✒️ टिल्लू शर्मा टूटी कलम रायगढ़…. वार्ड क्रमांक 25 की दिवंगत पार्षद संजना शर्मा के आत्महत्या मामले में पिछले 25 दिनों से जेल में निरूद्ध पत्रकार अमित पांडे को लेकर उनके भाई पत्रकार आलोक पांडे द्वारा एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर पुलिस की कमियां निकालने की कोशिशें की गई एवं यह बताया गया कि इस मामले में पुलिस एकपक्षीय कार्रवाई कर रही है जबकि शहर में यह अफवाह तेजी से वायरल हुई थी कि उक्त मामले में किसी कांग्रेसी नेता एवं ठेकेदार का बहुत बड़ा हाथ है बताया जा रहा है की संजना शर्मा के आत्महत्या करने से पहले 2 दिन पूर्व रात को कुछ लोग संजना शर्मा के घर जाकर काफी गाली गुप्तार किए थे ।जिस से आहत होकर संजना शर्मा ने उक्त आत्मघाती कदम उठा लिया परंतु पुलिस इस मामले में रशुखदारो को बचा रही है एवं पत्रकार अमित पांडे को महज मृतिका द्वारा लिखे गए आवेदन के आधार पर जेल विरुद्ध कर अपना पल्ला झाड़ लिया गया है ।जब पत्रकार अमित पांडे की जमानत याचिका की फाइल आगे बढ़ाई गई तब वकीलों ने क्षणिक भावावेश में आकर दिए गया जमानत आवेदन वापस लेकर अमित पांडे की पैरवी ना करने का फैसला किया था परंतु टूटी कलम ने उक्त मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था कि जब बड़े-बड़े आतंकवादी कसाब और अफजल गुरु को देश में वकील मिल सकते हैं तो क्या अमित पांडे का गुनाह इतना संगीन है कि उसकी पैरवी के लिए अधिवक्ता संघ ने इंकार कर रहे है। तब जिला अधिवक्ता संघ ने एकमत होकर यह फैसला लिया की पत्रकार अमित पांडे को केस लड़ने के लिए वकील स्वतंत्र है जिसका मुकदमा कोई भी वकील लड़ सकता है
आलोक पांडे ने बताया कि मृतक संजना शर्मा की काल डिटेल रिपोर्ट पुलिस द्वारा निकाली गई है। जिसमें किसी एक नंबर से 3 माह के भीतर संजना शर्मा को पंद्रह सौ बार फोन कॉल किए गए है एवं किसी कांग्रेसी नेता के द्वारा चार सौ बार मृतक संजना शर्मा को फोन कॉल किए गए हैं आखिर इतनी इमरजेंसी क्या पड़ी थी कि इन लोगों को इतनी बार फोन करने की आवश्यकता पड़ गई। टूटी कलम
पत्रकार आलोक पांडे द्वारा बुलाई गई प्रेस वार्ता में कोई भी ऐसी बात नहीं हो पाई जिससे लगे कि मीडिया कर्मी एवं पत्रकार अमित पांडे की जमानत रिहाई को लेकर कुछ बड़ा आंदोलन ,धरना, प्रदर्शन, क्रमिक भूख हड़ताल,करने की रूपरेखा तैयार करने पर विचार मंथन किया गया हो पत्रकारों के द्वारा एसपी ऑफिस ,पुलिस थाने के सामने धरना प्रदर्शन करने की भी कोई मंशा फिलहाल नहीं दिख रही है। प्रेस वार्ता में उपस्थित लोग एक दूसरे से सवाल जवाब करते रहे। टूटी कलम
अमित पांडे की पैरवी करने वाले अधिवक्ता की उपस्थिति जरूरी थी ….बुलाई गई प्रेस वार्ता में उन वकीलों की उपस्थिति निहायत जरूरी थी जो पत्रकार अमित पांडे की जमानत याचिका पर केस अपने हाथों में लिए हुए हैं ताकि प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों में के दिलो में उमड़ रहे प्रश्नों का सही जवाब वे ही दे सकते थे। टूटी कलम
पुलिस के हाथों में हो सकते हैं अहम सबूत पुलिस की कार्यशैली देखकर यही लग रहा है कि पुलिस के पास अमित पांडे के खिलाफ 306 के ऐसे तथ्य उपलब्ध हो चुके हैं जिससे अमित पांडे को फिलहाल कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। टूटी कलम
जले पर नमक छिड़कने के बहाने सहानुभूति देने पहुंचे थे कई मीडिया वाले सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आलोक पांडे द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में कई वे चेहरे नजर आए जो अमित पांडे की जेल यात्रा पर काफी हर्षित हुए थे। पुलिस भी पत्रकारों में आपसी मतभेदो का पूरा फायदा उठा कर अपनी मनमानी कार्रवाई कर रही है। प्रेस वार्ता के दौरान होना तो यह चाहिए था कि पत्रकारों द्वारा एकमत से यह प्रस्ताव पास कर दिया जाता कि आज के बाद किसी भी पत्रकार के द्वारा पुलिस का कोई भी समाचार प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं वेब पोर्टल पर नहीं चलाया जाएगा परंतु ऐसा होना संभव नहीं है क्योंकि कई लोग पुलिस के पत्रकार कहलाकार पुलिस की मंशानुसार रूप में कार्य कर अपना खर्चा पानी निकालते हैं। टूटी कलम





