रायगढ़—— जिला मुख्यालय से सटे ग्राम खैरपुर पंचायत अपने कार्यो की वजह से सुर्खियों में तो रहती है परन्तु अधिकारियो एवं मीडिया की निगाह में आने से बची भी रहती है। चाहे वह नहर पाटने का मामला हो कि रपटा बनाने का मामला हो चाहे वह मनरेगा के भ्र्ष्टाचार हो।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम खैरपुर ग्राम पंचायत के सचिव,सरपंच,उप सरपंच में लेनदेन कमीशन को लेकर हमेशा से रस्साकशी चलती आ रही है। भ्र्ष्टाचार के काले खेल में संलग्न इन लोगो की आपस मे ऊपरी तौर पर नही पट रही है। जिसका खामियाजा आने वाले समय मे ग्रामवासियों को भुगतना पड़ सकता है।
डोलोमाइट पत्थर की निकासी को लेकर चल रहा है –— रमणीक स्थल टीपाखोल में बहुमूल्य पत्थर डोलोमाइट प्रचुर मात्रा में है। जिसको निकालने का ठेका भिलाई की किसी कम्पनी ने लिया है।यदि वह एक नम्बर के माध्यम से डोलोमाइट का परिवहन करेगी तो उसकी होने वाली कमाई आधी हो जायेगी। इसलिए भिलाई की कम्पनी ने ग्राम के सरपंच,उपसरपंच को प्रलोभन देकर अपनी जाल में फांस लिया है। जिसकी वजह से टीपाखोल की छोटी पहाड़ी को काटकर नहर के ऊपर छोटी सी पुलिया का निर्माण ग्राम पंचायत की मद से करवा लिया है। जो कि नियमतः कानून के विरुद्ध है।
जिस पुलिया का आनन फानन में निर्माण करवाया गया है। वह भी गुणवत्ताहीन है। नहर के पानी निकासी के लिए ह्यूम पाईप डालकर उस पर फ्लाईएश डालकर दोनों तरफ 3-4फुट की दीवाल उठाई गई है। जिसमे भी सीमेंट कम और रेत ज्यादा मिलाई गई है। यह पुलिया किसी भी रूप 30-35 टन के डोलोमाइट भरे भारी वाहनों का भार सहने में सक्षम नही है।
यह डोलोमाइट पत्थरो की हेराफेरी के लिए सुगम मार्ग बनाया गया है। जहां से डोलोमाइट पत्थर लदी वाहने आसानी से ओड़िसा निकल सकती है। इस मार्ग में कोई चेक पोस्ट,बेरियर नही है। खनिज विभाग की भी दृष्टि इस ओर नही पड़ रही है। इस रपटे से गुजरने वाले भारी वाहनों से दुर्घटनाओ की रफ्तार में तेजी से इजाफा भी होगा। जिसमे कतई शक नही है। सब भारी भरकम दैत्याकार वाहने कई गावो के बीच से होकर गुजरेगी। जिससे ग्रामीणों की सुख शांति पर अतिक्रमण होगा साथ ही यह हरा भरा क्षेत्र प्रदूषण की चपेट भी आ जायेगा। फुर्सत के पल,पिकनिक मनाने जाने वालो पर हर पल मौत का साया मंडराने लगेगा। क्रमशः——- लगातार







