✒️ टिल्लू शर्मा टूटी कलम रायगढ़…ठंड की ठिठुरन लगातार हो रही बारिश के बावजूद कोरोना टेस्टिंग में पॉजिटिव मिले मरीजो की संख्या कोई कम हैरतअंगेज नही है। पूरे प्रदेश में हुई जांच के दौरान 5151 मरीजो का पाया जाना कोई कम विस्मयकारी नही है। जबकि शायद विदेश से आये ओमीक्रान सांथ लाये ग्रसित लोगो की गिनती सामान्य मरीजो से परे हो सकती है। दो साल से कोरोना संक्रमण की वजह से सुरक्षित लोग स्वयं को सुरक्षित महसूस कर बेपरवाह,लापरवाह होकर घूम फिर रहे है। सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग,राजस्व विभाग,निकाय विभाग के अधिकारी,कर्मचारी भी शायद 2 वर्षो में अपने आप को थका सा महसूस कर रहे है। इसीलिए सरकार एवं प्रशासन भी गाइडलाइंस जारी कर अपने होने का सबूत देने लगे है। न सोशल डिस्टनसिंग, न मास्क,न सेनेटाइजर,न हांथो को साबुन से धोते रहने की सलाह,न ऑक्सिमिटर, न थरमामीटर, न पीपीई कीट, न बाजारों के खुलने बंद होने पर कार्रवाई कुछ भी नही है इस दफे शायद कोरोना का संक्रमण भी कमजोर हो चला है। लेकिन इतना जरूर है कि लोग,छींकने,खांसने,थूकने,बुखार आदि से पीड़ितों के पास फटकने से भी डरने लगे है। प्रायमरी क्लास में पढ़ाये,सिखाये जाने वाले पाठ छींकते समय कपड़ा नाक,मुंह पर रखो,बेवजह मत घूमो,साबुन से हांथो को धोएं आदि दिमाग मे पूर्ण रूप से बैठा दिया गया है। टूटी कलम





