✒️ टिल्लू शर्मा टूटी कलम रायगढ़..…. शहर के जोरापाली-धनागर चौक,किरोड़ीमलनगर के बाजारों में स्टॉयगर खिलवाने के मॉध्यम से लोगो की जेबो एवँ मेहनत की कमाई को खुली आँखों के सामने लूट लिया जाता है। टूटी कलम
दो भाई है स्टॉयगर के डॉन…विश्वसनीय सूत्र बतलाते है कि इस घिनोने कार्य को दो भाई दिलेश्वर एवं गंगाराम नाम के लोग संचालित करते है। जो कि रायगढ़ के बाजीराव महारापारा के निवासी है। ये लोग कयाघाट,जेलपारा, गाटरखाल्हे के नाबालिक लड़को को स्टॉयगर फेंकने के गुर सिखलाते है और बदले में प्रतिदिन 200,500 रुपये देकर लाखो रुपयों की चकरी चला रहे है। पूर्व में यह खेल सारंगढ रेलवे क्रासिंग बड़पारा शराब भठ्ठी के पास खिलवाया जाता था परन्तु क्रासिंग बंद कर दिए जाने की वजह से ग्राहकों का आवागमन कम हो जाने की वजह से इन्होंने नया ठिकाना ढूंढ लिया है। जो कि पुलिस की पहुंच से दूर है। अलसुबह 6 बजे से 10 बजे एवं शाम 4 से 6 बजे तक जोरापाली चौक पर गमछा बिछाकर स्टॉयगर की चालबाजियों से ग्रामीणों,मजदूरों,ट्रक ड्राइवरों,कंडक्टरों,की खून पसीने की कमाई लूटी जाती है। इन दोनों भाइयों दिलेश्वर एवं गंगाराम ने आपसी समझौते के तहत अपने अपने क्षेत्र बांट रखे है ताकि कोई तीसरा धंधेबाज उनके क्षेत्रों में स्टॉयगर की बिसात न बिछा सके। ये लोग खेल स्थल से 100 मीटर दूर स्कॉर्पियो, इनोवा वाहनों में बैठकर निगाह जमाये रहते है एवं खेल स्थल से आधा किलोमीटर दूर सभी मार्गो में इनके मुखबिर तैनात रहते है। जो कि पुलिस वालों के आने की सूचना मोबाइलों के जरिये दे देते है। जिसके कारण स्टॉयगर खिलाने वाले लोग पुलिस की पकड़ में नही आते और भाग खड़े होते है। टूटी कलम
स्टॉयगर खिलाने वाले शातिर लोग तीन बड़े स्टॉयगर हांथो में पकड़े रहते है।जिनमे से 2 स्टॉयगर ब्लेंक रहते है और एक स्टॉयगर मे कोई स्टिकर लगा रहता है। स्टिकर वाले स्टॉयगर पर रुपया लगाने पर दुगुनी रकम दी जाती है परन्तु ये लोग इस चतुराई से स्टॉयगर फेंकते है कि लोग मूर्ख बन जाते है। यदि सही दांव किसी का लग जाता है इन लोगो का ही आदमी व्यवधान उतपन्न कर देता है और वह दांव केंसिल कर नया दांव फेंका जाता है। खेल की शुरुआत में इन्ही के आपसी लोग दांव खेलकर रुपया जितने के बहाने लोगो को फांसते है। जिससे लोग इनके आकर्षण में फंस कर अपने पास रखे अति आवश्यक रुपये भी हार जाते है। कोई दवा के लिए तो कोई राशन के लिए तो कोई बेटी की शादी के लिए जमा की गई रकम दुगुने होने के लालच में गंवा बैठते है। टूटी कलम
क्रमशः शेष अगले अंक में ठिकानों सहित अखबार में भी प्रकाशित किया जायेगा





