


🎯 टिल्लू शर्मा 🎤 टूटी कलम रायगढ़ … नगर पालिका निगम की एमआईसी की बैठक में 27 एजेंडे लाए गए जिन्हें बिना किसी विवाद के पास कर दिए गए क्योंकि विकास की सारी उम्मीदें 15वें वित्त मांग पर टिकी हुई है । बताया जा रहा है कि निगम के कबाड़ बेचकर कोई विकास ना करने की अपेक्षा महापौर के लिए नई वाहन खरीदने की के विचार रखे गए । ज्ञात रहे कि वर्तमान में महिंद्रा टीयूवी वाहन महापौर के लिए आवंटित है एवं इस वाहन को खरीदे हुए 7 या 8 साल ही हुए होंगे और अब जबकि विधानसभा चुनावों के बाद निगम के चुनाव होने हैं इसलिए वाहन पर की खरीदी पर लाखों रुपए खर्च कर देना किसी भी रूप में सही नहीं हो सकता क्योंकि आगामी जो भी नया महापौर चुनकर आएगा वह अपने लिए अलग एवं नए वाहन की मांग भी कर सकता है । इस तरह से निगम को दोहरी मार पड़ना संभावित है।

निगम अंतर्गत आने वाले 48 वार्डो की सड़कों की मरम्मत एवं निर्माण के लिए 80 लाख रुपए खर्च होने का आंकलन किया गया।जो कि एक हास्यापद एजेंडा रहा। 80 लाख रुपए से शहर के एक वार्ड की भी सड़कों की मरम्मत एवं निर्माण किया जाना जनता को अंधेरे में रखना कहा जा सकता है। लक्ष्मीपुर, केवड़ाबाड़ी बस स्टैंड से लेकर लालटंकी,हटरी चौक तक की सड़क का निर्माण किया जाए तो शायद दो तीन करोड रुपए खर्च होने की संभावना है। 80,00000 रूपयो से तो शहर की सड़कों का पैच वर्क भी पूरा नहीं किया जा सकता निर्माण किया जाना तो दिन में सपना देखने के समान है। वैसे भी अभी तीन माह वर्षा काल है इस दौरान नियमानुसार शासकीय निर्माण कार्य नहीं किए जाते हैं। इसलिए उक्त 27 एजेंडों को जनता के विरोध को खामोश रखने के लिए आगे बढ़ा दिए गए।

कुल मिलाकर एम आई सी की बैठक में हुए निर्णयो को जनता टाइमपास समझ रही है। जनता भी यह भली-भांति समझ चुकी है कि इस तरह की बैठकों में पास होने वाले एजेंडों को किसी भी रूप में पूरा नहीं किया जाता है। जनता को यह समझना होगा कि उक्त बैठक में 15 वे वित्त आयोग से धन की मांग की सहमति प्रदान की गई है ना कि शहर के विकास के लिए हरी झंडी दी गई है.






