🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़ कल शहर के अंदर कई वर्षों के बाद नगर निगम प्रशासन के द्वारा शहर की सड़कों के किनारे ठेले एवं अस्थाई रूप से बल्ली बांस,तिरपाल लगाकर व्यवसाय करने वालों का अवैध अतिक्रमण हटाए जाने की मुहिम चलाई गई थी। जब हंडी चौक से सेवा कुंज मार्ग के अतिक्रमण हटाया जा रहे थे इस बीच कांग्रेसी पार्षद शेख सलीम नियारिया के द्वारा अवैध अतिक्रमणकारियो के पक्ष में यह बोलकर निगम प्रशासन को चुप करवा दिया गया की नियम के अनुसार 15 जून के बाद किसी पक्षी का भी घोंसला नहीं तोड़ा जा सकता। इन व्यवसाईयों की तीमारदारी करते हुऐ पार्षद ने अपने स्वयं के द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए 2 दिन का समय भी मांगा गया था। जिस पर निगम प्रशासन ने अपनी सहमति देते हुए जेसीबी के प्रहार करने बंद कर दिए। जिन स्थानों से कल अतिक्रमण हटाने के लिए एक्सीलेटर का इस्तेमाल किया गया था उन जगहों पर आज भी अतिक्रमणकारियों के बांस,बल्ली लगे हुए हैं एवं लोहे के मजबूत काउंटर भी जस के तस रखे हुए हैं। इससे यह अंदाजा लग रहा है कि आने वाले दो-चार दिनों में फिर से इन स्थानों पर अतिक्रमण हावी हो जाएगा। गांधी चौक स्थित मौसमी फल – फूल बेचने वालों ने पुनः आज से ही सड़क पर बैठकर अपना व्यवसाय शुरू कर दिया है । जबकि इन लोगो को पूर्व आयुक्त आशुतोष पांडे के द्वारा गांधी गंज के भीतर एवं निगम कांप्लेक्स के सामने , पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बगल में दुकानें लगाने की जगह दे दी गई थी । कांग्रेसी पार्षद ने मीडिया के सम्मुख बयान देते हुए यह स्वीकारा कि उनके द्वारा सेवा कुंज मार्ग पर सात दुकाने संचालित करने की सहमति प्रदान की थी। इनके इस बयान से यह महसूस हो रहा है कि शहर के अंदर जितने भी अतिक्रमण हुए हैं वे जनप्रतिनिधियों, पार्षदों,रसूखदारो छत्रछाया में ही हुए हैं। संभवतया अतिक्रमण करवाने से लंबा मुनाफा भी होता होगा।
आमतौर पर यह हर बार देखा जाता है कि जब कभी भी निगम प्रशासन का तोड़ू दस्ता अतिक्रमण हटवाने के लिए सक्रिय होता है तो जनप्रतिनिधियों, विधायकों, मंत्रियों, रसूखदारो के फोन के द्वारा की जाएगी जा रही कार्यवाही को रुकवा दिया जाता है। जिससे निगम कर्मियों के हौसले भी ठंडे पड़ जाते हैं एवं वे हताश होकर वापस लौट जाते हैं। नव पदस्थ जिला कलेक्टर रानू साहू की छवि पूरे प्रदेश में एक असाधारण निर्णय लेने की क्षमता वाली है ।अब यह देखना है कि वे इस विषय पर कैसा रूप अख्तियार करती हैं। कोरबा कलेक्टर रहने के कार्यकाल के समय में उनका विवाद राजस्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल से काफी ज्यादा रहा परंतु रानू साहू का स्थान मुख्यमंत्री की नजरों में काफी बेहतर है । इस वजह से उन्हें सचिवालय ना भेज कर रायगढ़ जिला कलेक्टर का प्रभार दिया गया है। आने वाले समय में कलेक्टर रानू साहू की पहचान एक विकासशील विचारधारा की अधिकारी के रूप में होने लगेगी।