🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़ आश्विन माह के अंत में एवं सावन माह के शुरुआत में जमकर बदरा बरसे जिसको देखकर यह लगने लगा था कि इस बार सर्वाधिक वर्षा होने की संभावना है परंतु लोगों का यह भ्रम टूट गया क्योंकि इंद्र देवता मनुष्य की घबराहट एवं डर देखकर छुप गए। जिस अनुसार लोग डरे उसको देख कर शायद इंद्र ने यह सोचा कि अगर वे इसी तरह बरसते रहे तो मनुष्य उनको गालियां देने से भी पीछे नहीं हटेंगे। इंद्र देवता की नाराजगी के चलते मनुष्य गर्मी एवं उमस से परेशान हो गया है । लोगों में बेचैनियां एवं घबराहट की शिकायतें आने लगी है पूरा शरीर पसीने से तरबतर हो का चिपचिपाने लगा है। वर्षा के कारण लबालब हो चुके खेतों में धन की फसलें लगा दी गई थी ।जो अब सूखे की वजह से जमीन सुखकर फटने लगी है। जिस वजह से अकाल पड़ने की संभावना बलवती हो गई है। मनुष्य यह चाहता है कि भगवान भी उनके अनुसार बरसात करें क्योंकि अधिक वर्षा होने पर मनुष्य को अतिवृष्टि एवं कम वर्षा होने पर अल्पवृष्टि का बहाना मिल जाता है ताकि सरकार से मदद मिल सके। अब इंद्र देवता करें भी तो क्या करें ज्यादा बारिश होने पर भी उनको ऊलहाना मिलता है एवं कम वर्षा होने पर भी उनको ही कोसा जाता है। ज्यादा बारिश हो जाने पर नदी नाले उफान पर आ जाते हैं एवं नदियों के किनारे घर बना कर रहने वाले हालाकान हो जाते हैं किंतु उन्हें इस बात की संतुष्टि रहती है कि यदि उनके घरों को नुकसान पहुंचेगा तो सरकार उनकी मदद के लिए आगे आ जाएगी। बहुत से लोग सरकार से राहत, मदद मिलने की खातिर जानबूझकर नदियों एवं तालाबों के किनारे अपना आवास बनाते हैं। ऐसे लोग नदियों के किनारे जानबूझकर मिट्टी का घर बनाते हैं ताकि उनके आवास गिरने के कारण सरकार से आर्थिक मदद मिलने पर अपना पक्का घर बना सकें।
इंद्र देवता इस बार शायद इसलिए रूस गए की हरेली त्यौहार पर जब खेतिहर किसान खेती किसानी के काम आने वाले औजारों,हल,बैल, गैती,फावड़ा ट्रैक्टर आदि की पूजा कर गेड़ी चढ़कर, चीला, गुलगुला, बड़ा, आदि पारंपरिक भोजन बनाकर उत्सव मनाते हैं एवं रस्सी खींचो, जलेबी दौड़, नारियल फेंको आदि प्रतियोगिता का आयोजन करते हैं। इसके पश्चात फसल को बढ़ने एवं पकने का इंतजार करते हैं। 4 साल पकने के लिए बारिश होने का महत्वपूर्ण स्थान होता है। इंद्र देवता ने इस बार ऊपर से देख कर यह पाया कि कुछ छपास किस्म के जनप्रतिनिधि हरेली के दिन भी खेत में जाकर थरहा लगाने की फोटो खिंचवा कर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास किए हैं । इस वजह से इंद्र देवता ने बारिश रोक दी ताकि उनके द्वारा लगाए गए थरहा विकसित न होने पाए। इस तरह के छपास किस्म के कुछ जनप्रतिनिधियों की वजह से पूरे प्रदेश के खेतीहर किसानों को भुगतना पड़ रहा है क्योंकि राज्य में सूखे की स्थिति बनी हुई है। जिसको की आम भाषा में अकाल पड़ना कहा जाता है। हरेली के दिन जो लोग खेतों में जाकर थराहा लगाने की फोटो खिंचवाये है । संभवत उनके पास कृषि भूमि है ही नहीं एवं उनकी गिनती कृषकों में नहीं आती है। अगर सप्ताह भर के भीतर भरपूर बारिश नहीं हुई तो भयंकर अकाल पड़ने से कतई इंकार नहीं किया जा सकता।






