🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़….. जिले की कमान संभाल चुकी कलेक्टर रानू साहू अब एक्शन मोड पर आते दिख रही है. वे एक के बाद एक विभागों की समीक्षा कर भविष्य में किए जाने वाले कार्यों पर फोकस कर रही है। इसी कड़ी में वे अब रायगढ़ शहर के वार्डो का निरीक्षण कर संपूर्ण व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित करवाने के लिए वार्डो का भ्रमण कर निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आदेशित कर रही है। इससे यह लगने लगा है कि पूर्व कलेक्टर भीम सिंह के कार्यकाल में अधूरे कार्यों को तेजी से निपटाया जाएगा एवं कलेक्टर साहू के कार्यकाल में शहर के मास्टर प्लान पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। ज्ञात रहे कि रायगढ़ में सबसे बड़ी समस्या यातायात की है एवं दूसरी बड़ी समस्या दैनिक सब्जी मंडी संजय कंपलेक्स को व्यवस्थित करने की है। ज्ञात रहे कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा रायगढ़ की सब्जी मंडी संजय कंपलेक्स को नया रूप दिए जाने हेतु 14 करोड रुपए की स्वीकृति प्रदान कर दी गई थी। संजय कांप्लेक्स का नक्शा, स्टीमेट आदि बन कर तैयार है। जो निगम के जनप्रतिनिधियों ,अधिकारियों की उदासीनता की वजह से धरातल पर नहीं उतारा जा सका है। जबकि पूर्व कलेक्टर भीम सिंह के कार्यकाल के समय में ही संजय कंपलेक्स को अस्थाई रूप से इतवारी बाजार में शिफ्ट करने की मियादी घोषणा कर दी गई थी। उस समय यह लगने लगा था की संजय कंपलेक्स के निर्माण का कार्य अति शीघ्र प्रारंभ कर दिया जाएगा। मगर ना ही सब्जी मंडी शिफ्ट की जा सकी और ना ही संजय कंपलेक्स में कार्य शुरू किया जा सका। अब जबकि वर्तमान कलेक्टर रानू साहू ने इसमें दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी है तो निगम के उपायुक्त पानी, नाली, शौचालय, की बात कह कर काम को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। जिससे यह सवाल उठ खड़ा होता है की आखिर 1 साल से निगम प्रशासन इस दिशा में पहल क्यों नहीं किया। वैसे इतवारी बाजार के समीप सुलभ शौचालय संचालित हो रहा है। नाली की समस्या भी बहुत बड़ी नहीं है क्योंकि इतवारी बाजार के चारों तरफ नालिया बनी हुई है। अगर इसी तरह कार्य में टालमटोल किया जाता रहा तो संजय कांप्लेक्स के लिए मिला 14 करोड रुपए का फंड सरकार के पास वापस चला जाएगा। जिसे फिर उसे दुबारा से उपलब्ध करवाने की खातिर नए सिरे से दिमागी कसरत कर आवेदन पर आवेदन दिया जाना लगेगा।
शहर का मास्टर प्लान लागू होते ही निगम प्रशासन की सर दर्दी बढ़ जाएगी। जिस वजह से निगम के अधिकारी एवं कर्मचारी शहर के विकास के लिए कोई भी कदम आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं। पूर्व निगम कमिश्नर आशुतोष पांडे के कार्यकाल के समय रविशंकर शुक्ला मार्केट एवं न्यू मार्केट के दुकानदारों को अपनी अपनी दुकान के ऊपर बाहर निकाले गए छज्जों,बोर्डो को हटाने एवं सड़क से मिलाकर बनाए गए चबूतरों को 3 दिन के भीतर तोड़ने के आदेश दिए थे। आशुतोष पांडे के तबादला हो जाने के पश्चात उनके द्वारा दिए गए आदेश फाइलों में दबाकर छिपा दिए गए हैं। इसी तरह पुराना शनि मंदिर से सुभाष चौक ,महात्मा गांधी मार्ग के दुकानों एवं घरों को अतिक्रमण से मुक्त करवाने के लिए मार्किंग भी की गई थी ताकि शहर सुंदर लगने लगे एवं यातायात की समस्या से मुक्त हो सके। शुरू किया जाने वाला यह कार्य भी ना जाने किस वजह से रोक दिया गया। निगम प्रशासन के कार्यों की मंथर गति देखकर महसूस होता है कि यहां आने वाला हर अधिकारी आराम पसंद होता है एवं कार्यों से जी चुराता है। तबादला होने के पश्चात यहां पर आकर अपना कार्यकाल कुर्सी पर बैठे बैठे ही गुजारकर अन्य स्थान पर तबादला होने के पश्चात चला जाता है।
निगम उपायुक्त ने कलेक्टर को बताया कि संजय कांप्लेक्स के व्यवसाई स्वेच्छा से इतवारी बाजार में अपना व्यवसाय करने को राजी है फिर भी उपायुक्त के द्वारा कलेक्टर को दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया जाना आम आदमी के समझ से बाहर है। कभी बारिश का बहाना तो कभी पानी, शौचालय ,नाली का बहाना तो कभी गर्मी का बहाना यह सब बहाने तो आजीवन चलने वाले हैं परंतु विकास कार्यों को बहानेबाजी कर रोका जाना किसी भी रूप में उचित नहीं माना जाना चाहिए।






