🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़ आमतौर पर प्रायः यह देखा जाता है की लोग ग्लैमर्स, चकाचौंध,नाम सुख, सुविधाएं ,रसूख से प्रभावित होकर फिल्मी दुनिया की ओर बढ़ जाते हैं या फिर राजनीति से प्रभावित होकर सत्ता के मद में डूब कर रसपान करने की ख्वाहिश रखते हैं। जिस वजह से लोग अपनी पढ़ाई लिखाई त्याग कर नेता या अभिनेता बनना चाहते हैं जोकि शुरुआती दौर में तो काफी सरल महसूस होता है। गोरी, चमड़ी, नैन मटक्का,कमर हिलाना, इठलाना, इतराना, गाना गाना, बाइशेप, ट्राइसेप, सिक्स पैक, को ही लोग फिल्मी दुनिया में जाने के लिए पर्याप्त मान लेते हैं। लेकिन बॉलीवुड में एंट्री पाना किसी के बूते की बात नहीं है। जो लोग बचपन से ही रंगमंच से जुड़ते हैं, नृत्य, अभिनय कला सीखते हैं, सुर संगीत पर साधना करते हैं उनको भी बॉलीवुड में प्रवेश नहीं मिल पाता है। अंततः उनकी हालत ना घर की रहती है और ना घाट की रहती है। उनके द्वारा पेट पालना, घर चलाना, परिवार की परवरिश करना अत्यंत दुष्कर हो जाता है। अंत में मानसिक संताप के कारण स्वास्थ्य भी साथा देना बंद कर देता है। कुछ इसी तरह की हालात राजनीति में अपना भाग्य आजमाने वालों की होती है।
कलेक्ट्री छोड़कर राजनीति में आना बुद्धिमता का परिचायक नहीं है….. राजनीति में पद, पावर, पैसा, रसूख, इज्जत आदि से अभिभूत होकर देश की प्रथम शिक्षा प्राप्त कर कलेक्टर बनकर मानव सेवा, राज्यसेवा, देशसेवा,करने वाले लोग राजनीति के चक्कर में इस कदर आकर्षित हो जाते हैं की वे कलेक्ट्री छोड़कर राजनीतिक पार्टी का झंडा उठा लेते हैं। यहीं से इनकी पढ़ाई का ,पावर का, इज्जत का रसूख का ,पतन होना शुरू हो जाता है। कलेक्टर के चेंबर में घुसने से डरने वाले लोग एवं समाज के अवांछित तत्व पूर्व कलेक्टर के साथ हाथ मिलाते हैं ,बांहों में भरते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, लंगोटिया मित्रवत व्यवहार करते हैं,नाराज होते हैं ,गुस्सा दिखाते हैं, हंसी ठिठोली करते हैं। ऐसे में कलेक्टर का मिला पद दो कौड़ी का भी नहीं रह जाता है। जो पहले कलेक्टर बंद चेंबर में बैठे किस से मिलना है किस से नहीं मिलना है इसका फैसला लेते थे। राजनीति में आने के बाद वे कलेक्टर, कलेक्टर ऑफिस के बाहर कलेक्टर से मिलने के लिए पर्ची भेजते हैं ।तब कितना भार लगता होगा कलेजे पर यह तो कलेक्टरी की छोड़कर राजनीति करने वाले पूर्व कलेक्टर ही समझ सकते हैं। कलेक्टर छोड़कर राजनीति में भाग्य आजमाने वाले पूर्व कलेक्टर को थानों तक में इज्जत नहीं दी जाती है ।पूर्व कलेक्टर राजनीति की खातिर भरी गर्मी में, तपती दोपहरी में, शोलो की माफिक सुलगती सड़कों पर बैठकर जब धरना प्रदर्शन करते हैं तो उपस्थित अधिकारीगण मन ही मन हंसते हैं।
कलेक्ट्री छोड़कर राजनीति करने वाला प्रत्येक पूर्व कलेक्टर अजीत जोगी नहीं बन सकता…. छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी जो किसी समय अविभाजित मध्य प्रदेश में कलेक्टर हुआ करते थे ।उन्होंने कलेक्ट्री छोड़कर राजनीति में मजबूरी वश आना पड़ गया था परंतु भाग्य ने उनका साथ दिया और वे कांग्रेस पार्टी से राज्यसभा सदस्य, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रवक्ता, रायगढ़ के सांसद, छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री बनते गए। अजीत जोगी को मिली राजनीति कामयाबी के बाद कई कलेक्टरो के मुंह में पानी आ गया और वे स्वयं को राष्ट्रीय स्तर का नेता बनाने एवं मुख्यमंत्री बनाने के लिए कलेक्ट्री छोड़कर राजनीति में आ गए। सत्ता, पावर,इज्जत, रसूख आदि किस्मत वालों को ही नसीब होता है। अगर इस तरह कलेक्ट्री छोड़कर राजनीति करने पर मुख्यमंत्री बना जा सकता है तो देश के सारे आईएएस नौकरी छोड़ कर राजनीति करने लग जाएंगे।
इस्तीफा नाम मंजूर हुआ आईएएस का… आईएएस टॉपर शाह फैजल ने नौकरी से इस्तीफा देकर राजनीति में भाग्य आजमाना चाहा परंतु राजनीति की गंदगी देखकर उन्होंने भारत सरकार से अपना इस्तीफा अस्वीकार करने का निवेदन किया था। जिस पर सरकार ने फैसला लेते हुए उनको पुनः नियुक्त करने का आदेश दिया गया। इनके द्वारा डीओपीटी विभाग में दिया गया आवेदन स्वीकार कर राजनीति करने की मंशा से नौकरी छोड़ चुके हैं कलेक्टरों को एक बार पुनः मौका मिलने की आस जग गई है।







