🔥 टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़ जब भी क्रिकेट सट्टा, सट्टेबाज, खाईवाल का मामला सामने आता है तो सर्वप्रथम दिमाग के अंदर मारवाड़ी और मुस्लिम चेहरे होने का ख्याल आता है। जबकि पुलिस के द्वारा की जा रही लगातार कार्रवाई मैं एक विशेष समुदाय के लोग ही पकड़ाए जा रहे हैं। कोई लालचंदानी है, तो कोई मनचंदानी है, तो कोई सोभवाणी है, तो कोई मोटवानी है। पुलिस की कार्रवाई इनके दो नंबरी दंगों पर ना हो इसलिए समाज विशेष के द्वारा कुछ बेरोजगार, बेकार, निठल्ले, अनपढ़, मूर्खों को मीडिया से जुड़ने का तरीका बताया जाता है ताकि उनके अवैध व्यवसाय पर कार्रवाई होने के समय समाज के तथाकथित व्यवसाई मीडिया का नाम बदनाम करने वालों को सामने का मामले को रफा-दफा करवाया जा सके। इस तरह के तथाकथित मीडिया कर्मी सभी थाना प्रभारियों, एडिशनल एसपी, सीएसपी, एसडीओपी, आरक्षक आदि की जी हजूरी करते कहीं भी देखे जा सकते हैं। समाज विशेष के मीडिया कर्मियों के द्वारा पुलिस के कार्यों को इतना बढ़ा चढ़ा कर बताया जाता है मानो पुलिस वाले ने ऐसा कार्य कर दिया हो जिसकी लोगों ने कल्पना भी नहीं की होगी। जबकि पुलिस का कार्य ही होता है अपराध पर नियंत्रण रखना और कार्रवाई करना। इसीलिए लोगों के द्वारा पुलिस की नौकरी की जाती है। चापलूसी करने,चटवा गिरी करने में माहिर मीडिया कर्मियों के समाचार पर पुलिसकर्मी, अधिकारी खुश अवश्य होते होंगे परंतु उच्चाधिकारियों के नजरों में उनका सम्मान कम होता जाता है। समय आने पर छपास रोगी पुलिस वालों को उच्चाधिकारियों के द्वारा लाइन हाजिर कर बंद आंखें खोलने की सजा दी जाती है।
मंदबुद्धि, अनपढ़ ,जाहिल, गवार, मूढ़ किस्म के तथाकथित मीडिया कर्मी कहलाने वालो की निगाहें पुलिस विभाग में होने वाले स्थानांतरण पर टिकी रहती है ताकि वे पदभार ग्रहण करने वाले पुलिस अधिकारियों की गोद में जा बैठे और अपने पूर्व संबंधों का हवाला देकर अधिकारियों की मुनीम गिरी कर सके। इस तरह के मुनीमो के कमीशन बंधे बंधाए तय रहते है। डायन भी 9 घर छोड़ देती है किंतु इस तरह के मीडिया कर्मी अपने सगे, संबंधियों, रिश्तेदारों ,दोस्त, यारों तक को नहीं छोड़ते हैं। जब भी मौका मिलता है तो डंक मारने से पीछे नहीं रहते हैं। घर में पत्नी, बच्चे हो या ना हो किंतु पैसे के लिए ये अपना ईमान तक बेच डालते हैं और नमक हरामि करने में पीछे नहीं रहते हैं।




