🔥टिल्लू शर्मा ✒️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पश्चात छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी फिल्मों की मांग बढ़ने की वजह से राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ फिल्म बोर्ड की स्थापना कर फिल्म से जुड़ी डायरेक्टर से लेकर मेहमान कलाकारों का अभिनय करने वाले तक को प्रोत्साहित किया जाने लगा। छत्तीसगढ़ी फिल्म माया देदे माया लेले के अभिनेता अनुज शर्मा को पद्मश्री पुरस्कार देखकर नवाजा गया।
माया देदे माया लेले को मिली सफलता के पश्चात छत्तीसगढ़ी फिल्म बनाने के लिए कई डायरेक्टर, प्रोड्यूशर, गीतकार, संगीतकार पटकथा लेखक आदि थोक के भाव में सामने आ गए इनके द्वारा फिल्मों के नाम मया से संबंधित रखे जाने लगे। मायाका अर्थ प्यार होता है। आज तक जितने भी छत्तीसगढ़ी फिल्म आई है उनमें से अधिकतर फिल्मों के नाम मया की माया में उलझ कर रह गए हैं।छत्तीसगढ़ी फिल्म राधे अंगूठा छापती है, तीजा के लुगरा, लैला टिपटॉप छैला अंगूठाछाप, चल हट कोन्हो हो देख लिही , हंस झन पगली फंस जाबे, टुरा रिक्शावाला,तहु कुंवारी महू कवारा, झोलटूराम आदि कई ऐसे नाम है जिनको देखने पढ़ने के पश्चात शर्मिंदगी महसूस होती है।
नई फिल्म का नाम है जिमी कांदा शायद छत्तीसगढ़ फिल्म बनाने वालों को नामों की कमी अकाल पड़ गया है। इन दिनों शहर की टॉकीज में छत्तीसगढ़ी फिल्म जिमी कांदा लगी हुई है जिसका पोस्टर देखने के पश्चात मन ही मन में हंसी आती है। ऐसा बुरा वक्त आ गया है कि छत्तीसगढ़ी फिल्म बनाने वालों को फिल्मों की टाइटल का दुकान पड़ गया है। यहां यह बतलाना अति आवश्यक है कि जिमी कांदा एक पेड़ की जड़ होती है जिसको खाने के बाद कई तरह की नुकसान उठाने पड़ सकते हैं सबसे पहले यदि जिमी कांदा की सब्जी गुणवत्ता के साथ ना बनाने पर जीभ एवम गले मैं कांटे उग आए है जैसे महसूस होता है। सुशील की है अभिनेता अभिनेत्री सहित अन्य कलाकारों के द्वारा पिकअप में सवार होकर पूरे शहर का भ्रमण किया गया एवं जनता से फिल्म देखने का निवेदन किया गया। फिल्म यूनिट के द्वारा एक प्रेस वार्ता का भी आयोजन कर मीडिया के माध्यम से फिल्म के गुणगान करने की अपील की गई थी। मगर किसी भी तरह की प्रेस विज्ञप्ति जारी ना करने की वजह से मीडिया कर्मी फिल्म यूनिट के द्वारा उपलब्ध करवाए गए गए चाय- बिस्किट का स्वाद लेकर अपने अपने घरों की ओर चलते बने.







