🔱टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम 🎤 न्यूज रायगढ़ छत्तीसगढ़ 🌍…….. रायगढ़ विधायक वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने चुनाव जीतने के पक्ष टी मीडिया के सामने कहा था की उनके नाम से यदि कोई कमीशन मांगता हो और भ्रष्टाचार में लिप्त रहता हो तो उसे जूते की माला पहनाकर थप्पड़ों से मारा जाएगा। मगर कथनी और करनी में फर्क होने से किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं होने से कमीशन खोरो और भ्रष्टाचारियो के हौसले बुलंद हो चुके हैं। खुले आम रिश्वत मांगने का बाजार गर्म हो गया है। निर्माण कार्यों में घटिया सामग्रियों का उपयोग शुरू हो गया है। जब तक कुछ लोगों को दंडित नहीं किया जाएगा तब तक उनके हौसले दिनों दिन बढ़ते रहेंगे. भ्रष्टाचारियो कमीशनखोरों से पीड़ित जनता कातर दृष्टि से ओ पी चौधरी की तरफ टकटकी लगाए देख रही है. निर्माण कार्यों में मॉनिटरिंग नहीं होने की वजह से ठेकेदारों की बल्ले बल्ले हो गई है। राजा मामला निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 38 का है. जहां ठेकेदार के द्वारा लगभग 1 किलोमीटर लंबी बीटी सड़क का निर्माण करने में थूक पॉलिश की गई थी। कुछ दिनों बाद जब सड़क उखड़नी शुरू हो गई। जिस पर जब जनता का ध्यान दिया और विरोध करना शुरू किया गया दो ठेकेदार के द्वारा पूरी सड़क उखाड़ कर फिर से सड़क बनाना शुरू कर दिया। इस भ्रष्टाचार में ठेकेदार शासकीय कर्मचारी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं किया जाना। ओपी चौधरी के सामने सबसे बड़ा प्रश्न है।
शहर के वार्ड क्रमांक 38 में 1 करोड़ दस लाख रुपए की लागत से लगभग 1 किमी नवनिर्मित बीटी सड़क की घटिया गुणवत्ता को लेकर विरोध का असर अब साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। खबर के बाद हरकत में आए नगर निगम प्रशासन ने सड़क निर्माण में गंभीर लापरवाही को स्वीकारते हुए संबंधित ठेकेदार को न केवल नोटिस जारी किया, बल्कि जहां गुणवत्ताविहीन सड़क का निर्माण कराया गया।उसे उखड़कर फिर से बनाने निर्देश भी दिए हैं। निर्माण के कुछ ही दिनों के भीतर नवनिर्मित बी टी रोड के अलग अलग स्थानों से डामर की परत उखड़ने लगी थी और गिट्टी खुलकर सड़क पर दिखाई देने लगी, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए थे। इस संबंध में जनकर्म में प्रकाशित खबर के बाद निगम प्रशासन ने ठेकेदार से जवाब तलब किया था।
मेंटेनेंस की भी उठानी होगी जिम्मेदारी
गौरतलब हो कि निगम प्रशासन ने ठेकेदार को सख्त निर्देश देते हुए स्पष्ट किया है कि वार्ड 38 में बनी बीटी सड़क के निर्माण में जहां खामियां है उसे फिर उखाड़कर नए सिरे से गुणवत्ता के अनुसार बनाया जाए। इसके साथ ही, ठेकेदार को आगामी तीन वर्षों तक सड़क के मेंटेनेंस की पूरी जिम्मेदारी भी निभानी होगी। इस अवधि में यदि सड़क में किसी प्रकार की खराबी पाई जाती है, तो उसकी मरम्मत ठेकेदार को करनी होगी।वर्तमान में ठेकेदार द्वारा खराब निर्माण को उखाड़कर पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस बार निर्माण कार्य की सतत निगरानी की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।बहरहाल, यह देखना लाजमी होगा कि दोबारा किए जा रहे निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता तो नहीं किया जाता, या फिर निगम प्रशासन की सख्ती ठेकेदार के लिए सबक साबित होती है। स्थानीय नागरिकों को भी उम्मीद है कि इस बार उन्हें टिकाऊ और मजबूत सड़क मिलेगी।
पूर्व निर्माण में अनदेखी क्यों ?
करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपए की लागत से निर्मित सड़क की गुणवत्ता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि सड़क निर्माण के दौरान ही नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सतत और तकनीकी निगरानी रखी जाती, तो संभवतः आज इस सड़क को जगह जगह से दोबारा उखाड़ने की नौबत नहीं आती। निर्माण पूर्ण होने के कुछ ही समय बाद सड़क की परत उखड़ने लगी, जिससे साफ जाहिर होता है कि गुणवत्ता की जमकर अनदेखी की गई।इस लापरवाही का खामियाजा सीधे तौर पर आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि मामला उजागर होने और खबर प्रकाशन के बाद निगम द्वारा घटिया निर्माण वाले हिस्से को पुनः उखाड़कर दोबारा निर्माण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
वर्शन/ वार्ड क्रमांक 38 में 1 करोड़ दस लाख रुपए की लागत से सड़क का निर्माण हुआ है।कही कही इसके निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी की गई है।जिसके लिए उन हिस्सों को फिर से उखाड़कर ठेकेदार को पुनः निर्माण के लिए निर्देशित किया गया है।साथ ही निर्माण के तीन वर्षों तक सड़क के गुणवत्ता की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होगी।
ए के लोहिया
कार्यपालन अभियंता नगर निगम