रायगढ़ जिले का बहुचर्चित लोकप्रिय सर्वाधिक पढ़े जाने वाला नंबर वन की तरफ तेजी से बढ़ रहा *टूटी कलम समाचार* पत्रकारिता करना हमारा शौक है, जुनून है, आदत है, दिनचर्या है, कमजोरी है,लगन है,धुन है, पागलपन है ,पत्रकारिता करना हमारे पेट भरने का साधन नहीं है, और ना ही ब्लैकमेलिंग, धमकी,चमकी,देकर, विज्ञापन के नाम पर उगाही,वसूली करने का लाइसेंस मिला हुआ है, संपादक टिल्लू शर्मा लेखक, विश्लेषक, कवि,व्यंगकार,स्तंभकार, विचारक, माता सरस्वती का उपासक,परशुराम का वंशज,रावण भक्त,कबीर से प्रभावित,कलम का मास्टरमाइंड, सही और कड़वी सच्चाई लिखने में माहिर, जहां से लोगों की सोचना बंद कर देते है हम वहां से सोचना शुरू करते है, टिल्लू शर्मा के ✍️समाचार ज्यों नाविक के तीर,🏹 देखन म छोटे लागे, घाव करे गंभीर, संघर्ष और विरोध जितना अधिक होगा सफलता उतनी शानदार होगी, टिल्लू शर्मा नाम ही काफी है तुम अपनी जलन बरकरार रखो हमारा जलवा बरकरार रहेगा, इलाका किसी का भी हो धमाका हमारा ही होगा, हम तक पहुंचने के लिए अपनी लाइन बड़ी करनी पड़ेगी, शेर के पांव में कांटा चुभ जाने पर कुत्ते जंगल पर राज नहीं करते हैं.✍️✍️✍️
🔱टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम 🎤 न्यूज रायगढ़ 🌍 छत्तीसगढ़ 🏹… आज पुलिस कंट्रोल रूम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के द्वारा एक प्रेस वार्ता दोपहर 1:30 बजे आयोजित की गई. प्रेस वार्ता क्रिकेट सट्टा के आरोपियों को हावड़ा (पश्चिम बंगाल) की सर सुविधा युक्त एक होटल से पकड़ कर ले जाने के खुलासे हेतु रखी गई थी। रायगढ़ जिले के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि पुलिस के द्वारा सटोरियों को अन्य प्रांत से पकड़ कर लाया गया और मीडिया के सामने प्रस्तुत कर दिया गया। प्रेस वार्ता की सूचना पाकर मीडिया के लोग, पुलिस अधीक्षक के सामने की पहली कुर्सी पर जगह पाने की उम्मीद में दोपहर 1:00 बजे से ही पुलिस कंट्रोल रूम में जुटना शुरू हो गए थे। जबकि पुलिस अधीक्षक निर्धारित समय से कुछ मिनट देरी से पहुंचे थे।
पुलिस अधीक्षक ने जानकारी देते हुए बताया कि मामला अप्रैल 2025 का है। जब क्रिकेट सट्टा के आरोप में चक्रधर नगर डिग्री कॉलेज के पास एक व्यक्ति ऑनलाइन सट्टा खिलाते हुए पकड़ा गया था। जिसने पूछताछ में अपने अन्य साथियों का नाम गूगल दिया था। जिन लोगों के नाम सामने आए थे वे लोग गिरफ्तारी से बचने के लिए। हावड़ा चले गए थे। शशि मोहन सिंह ने बताया कि उनके विश्वस्त मुखबिर ने फरार लोगों के हावड़ा के एक होटल में रुक कर क्रिकेट विश्व कप के दौरान करोड़ों के दांव लगवाए जाते रहे। मुखबिर की सटीक सूचना पर पुलिस अधीक्षक ने साइबर सेल सिटी कोतवाली, चक्रधर नगर पुलिस टीम का गठन कर आरोपियों को दबोचने के लिए हावड़ा रवाना किया था. जहां रायगढ़ पुलिस ने बंगाल पुलिस का सहयोग लेकर होटल पर छापेमारी की थी. जहां पांच आप ए पकड़े गए और 02 आरोपी होटल से बाहर निकल चुके थे।
शशि मोहन सिंह ने बताया कि छापेमारी के दौरान होटल के कमरे में कुछ युवक क्रिकेट मैच के दौरान सट्टा खिलाने का कार्य कर रहे थे। पुलिस ने तगड़ी घेराबंदी करते हुए इन्हें पकड़ा गया। गिरफ्त में आए सट्टेबाज पुलिस को लाखों रुपए देने का प्रलोभन देकर मामला वहीं सुलटाने का प्रयास किया गया था परंतु पुलिस कप्तान शशि मोहन सिंह के स्पष्ट निर्देश और कड़क स्वभाव की वजह से किसी ने भी लालच नहीं दिखाया।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने होटल के कमरे से मय आरोपियों के 25 महंगे मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, कैलकुलेटर, 36,500 की नगद जप्ती कर रायगढ़ लाया गया और मीडिया के सामने प्रस्तुत कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक बार फिर से पुलिस अधीक्षक ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी कि वे अपने कार्यकाल के आखिरी दिन तक इसी तरह की कार्रवाई करते रहेंगे। अवैध शराब, गांजा, जुआ, सट्टा,देह व्यवसाय,कबाड़,नशीली दवाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अपनी जंग जारी रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि अपराधी गुंडे मवाली रायगढ़ शहर या रायगढ़ जिला छोड़ दे क्योंकि रायगढ़ पुलिस किसी भी तरह के समझौते के दबाव में नहीं आएगी। उनको कमाई के लिए गैरवाजिब लक्ष्मी की आवश्यकता नहीं है। उनकी आवश्यकताऐं सरकार से प्रतिमाह मिलने वाली सैलरी से पूरी हो जाती है। राजनीतिक दबाव की वजह से ज्यादा से ज्यादा उनका स्थानांतरण किया जा सकता है किंतु आईपीएस का अवार्ड छीना नहीं जीना जा सकता.
शशि मोहन सिंह की कार्यशैली से अवैध अनैतिक कार्य करने वालों में हड़कंप मच गया है एवं भागम भाग की स्थिति निर्मित हो रही है। अब लगने लगा है कि मुर्दों के शहर में पुलिस अपनी कार्रवाई पूरी ईमानदारी के साथ कर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के बाद अब महसूस होने लगा है कि पुलिस का अपना भी अलग ट्रेलर होता है। अनैतिक और सामाजिक कार्य करने वाले या तो शहर छोड़ चुके हैं या अपना धंधा सीमित कर दिए हैं और श्याम नाम की माला जपने में मशगुल हो चुके हैं। कप्तान के आदेश पर जिस तरह से पुलिस काम करने लगी है इस वजह से आम जनता के बीच 25 वर्षों से रायगढ़ पुलिस की बिगड़ी हुई छवि संवरने लगी है।
एक समय ऐसा था जब थाना प्रभारी कप्तान को बगैर सूचित करें कोलकाता जाकर सटोरियों से लाखों रुपए नगद का नजराना ले आते थे और सटोरियों पर करवाई शून्य हो जाया करती थी। अब एक समय ऐसा आ गया है की कप्तान फील्डिंग जमाते हैं और उन पर पूरी निगाहें रखते हैं। जिस वजह से मांड़वाली होने की कोई संभावना नहीं होती है।



