फर्नीचर मार्ट के पीछे जंगली झाड़ियों के पीछे छिपाकर रखे गये थे। बहुमुल्य गोले,गोदाम में बनाकर बिक्री के लिए रखे गए थे,चौखट, पल्ले,खिड़कियां
रायगढ़—– रायगढ़ के इतिहास में पहली बार इतने अधिक ₹ के इमारती लकड़ी के अवैध गोले,खिड़की,चौखट,पल्ले वनमंडल की छापेमारी में पाये गये कि लोगो की आंखे फटी की फटी रह गई। लाकडाउन का अगर किसी ने सही फायदा उठाया है तो वह है। आर.के.फर्नीचर के संचालक राजकुमार अग्रवाल ने,लाकडाउन के समय सारे सरकारी विभाग सुप्तावस्था में रहे और लकड़ी तस्कर लकड़ी की हेराफेरी में लवलीन रहे। जिस कारण से मिट्टी तेल का कारोबार करने वाले ने लकड़ी के काम मे ज्यादा मुनाफा सोचकर अपने व्यवसाय का रूप परिवर्तन कर डाला।
रिटायर होने से पूर्व रेंजर राजेश्वर मिश्रा ने छापेमारी की कार्रवाई कर प्रशिक्षु रेंजर लीला पटेल को कार्यवाही करने के पैंतरे सिखलाये जा रहे है। जो कि लकड़ियों के अवैध कारोबारियो की नकेल कसने में मददगार साबित होंगे।
प्रशिक्षु रेंजर लीला पटेल की धमाकेदार इंट्री से वन विभाग की साख में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। जिसे देखकर वन विभाग एस डी ओ ए.आर. बंजारे भी पिछले तीन दिनों से कमरकस कर कार्यवाही पूरी करवा रहे है।

बतलाया जा रहा है कि फर्नीचर मार्ट में चंहुओर इमारती लकड़ियों के गोले पड़े थे। जिन्हें एक्सीवेटर (क्रेन) की सहायता से ट्रकों में लोड कर उर्दना काष्ठागार भिजवाया जा रहा है। साथ कि बने बनाये चौखटे,खिड़कीयां,पल्ले भी जप्त किये गये है। एक अनुमान के अनुसार 10 से 15 लाख₹ की वन सामग्रियां जप्त की गई है। हो सकता है कि वन विभाग फर्नीचर मार्ट के उपकरणों की जप्ती बना दे। बतलाया जा रहा है कि लकड़ी के 164 गोले जप्त किये गये है। समाचार लिखे जाने वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी मूल्यांकन करने में लगे हुए है। जिसकी स्पष्ट जानकारी कल तक आने की उम्मीद है। बरहाल वन विभाग की इस कार्यवाही से लकड़ी कारोबारियो की नींदे उड़ी हुई है और अगला नम्बर किसका होगा। इन सब मे माथापच्ची की जा रही है।









