*कोरोनाकाल में क्यो शुतुरमुर्ग हो गए शहर के समाज सेवी संगठन और उद्योगपति, प्रशासन ले सहयोग*
स्व सेठ किरोड़ीमल जी की कर्मभूमि में ऐसा कोई व्यक्ति या संस्था नही है क्या जो प्रशासन के सहयोग से नटवर स्कूल जैसे किसी भवन को कुछ समय के लिए व्यवस्थित कोविड सेंटर में बदल सके जहां कोरोना के सामान्य मरीजो को दूसरी सुविधाओ के साथ ढंग का भोजन मिल सके ? उद्योगों के सीएसआर और डीएमएफ के करोड़ो रूपये के फंड आखिर कब काम आएंगे ?
उंगली कटा कर शहीद का दर्जा पाने की मंशा रखने वाली रायगढ़ की समाज सेवी संस्थाए कहां विलुप्त है। कहाँ है बड़ी बड़ी कम्पनियों के मालिक जिन्होंने रायगढ़ को दुधारू गाय की तरह अब तक दुहा और अब बीमारू समझ कर पल्ला झाड़ रहे है। अब जबकि ऐसी समाज सेवी संस्थाओं, पूंजीपतियों और सेवाभावी समाज सेवियों की सबसे ज्यादा जरूरत है तो सब गायब नजर आ रहे है। रायपुर में एक समाज सेवी संस्था ने 150 बेड का पूरा कोविड सेंटर बना दिया। निशुल्क इलाज , मरीजो को पोषण युक्त भोजन, आवश्यक दवाई और डॉक्टरों की देखरेख की व्यवस्था कर दी फिर रायगढ़ में ऐसा करने कोई आगे क्यो नही आता ? इस बार चक्रधर समारोह नही हुआ .. इस खर्च को चक्रधर समारोह में दिया गया चंदा ही समझ लें।
यह कोई उलाहना नही है। कटाक्ष भी नही है। यह एक सन्देश है कि अब इस दिशा में काम करने की जरूरत है। जिस हिसाब से कोरोना अनियंत्रित हो कर घरों में घुस रहा है उसके बाद भी लोग सरकारी कोविड अस्पतालों में जाने से डर रहे है उसे देखते हुए कुछ व्यवस्थाओं को सरकारी व्यवस्था से मुक्त करने की जरूरत है। कोविड सेंटर न सही कमसे कम सरकारी कोविड सेंटरों में अच्छे भोजन की व्यवस्था तो की ही जा सकती है।
प्रशासन को भी समाज सेवी संस्थाओं उद्योग पतियों की बैठक बुला कर इस दिशा में सकारात्मक पहल करवाने की जरूरत है। इससे पहले की जांजगीर जैसी घटना हमारे जिले में हो हमे फौरी तौर पर पहल करनी चाहिए। यह स्वीकार करना होगा कि सरकारी कोविड सेंटरों की हर वक्त की निगरानी जिला प्रशासन खास कर कलेक्टर के लिए सम्भव नही है लिहाजा यह काम समाज सेवी संस्थाओं के सुपुर्द करने में सार है। यदि जिला प्रशासन, रायगढ़ के उद्योगपति और समाज सेवी संगठन इतना भी नही कर सकते तो मरीजो को उनके घर से भोजन मंगवाने की अनुमति दे दी जाए। परिजन अपनी क्षमता के मुताबिक खुद व्यवस्था कर लेंगे। प्रशासन कोई भी उपाय करें मगर अव्यवस्था के नाम पर लोगो मे कोविड अस्पतालों के भय को निकालने का प्रयास करे ।








