आयुक्त एवं पार्षद की इसकदर हुई नोकझोंक की आयुक्त को पुलिस बुलानी पड़ गई
रायगढ़—- वैसे भी रायगढ़ नगर निगम राजनीति का सबसे बड़ा अखाड़ा बन गया है। अकुशल लोगो को एम आई सी में लेना,एल्डरमैन बनाना कांग्रेस की फजीहत का मुख्य कारण है। शहर में तेजतर्रार, कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ताओ की कमी नही है बावजूद इसके जड़ें कांटने वालो को आगे ला कर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना हो सकता है। जिन लोगो का घर मे वजूद न हो वे कैसे लोगो के बीच वजूद बना सकते है। चमचागिरी या टेबल पार्टनर बनकर पद दे देना। पार्टी के लिए शुभ संकेत नही है।
कांग्रेस की धाकड़ महिला पार्षद ने निगम कार्यालय में जो उत्पात किया वह किसी भी रूप में पचनीय नही है। पार्षद ने अपने वार्ड में अतिक्रमण की शिकायत की थी। जिसपर आयुक्त ने संज्ञान लेते हुए। निगम से तोड़ू दस्ता रवाना किया था। दस्ते ने नापजोख कर तोड़ने की कार्रवाई शुरू की तो पार्षद का मूड उखड़ गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पार्षद ने किस अतिक्रमण तोड़ने का आग्रह किया था उसकी जद में 5 आवास आ रहे थे। जबकि पार्षद 1 आवास को तुड़वाने पर आमादा थी। वे चाहती थी कि उनके विरोधी मात्र का एकमात्र का आवास टूटे और उनके चार अन्य के आवास सुरक्षित रह जाये। जिसपर आयुक्त ने बराबर की कार्यवाही करने के आदेश दिए थे। आयुक्त के इस आदेश से पार्षद तिलमिला गई और सीधे आयुक्त के चेम्बर में घुसकर टेबल पीटने लगी। आयुक्त के समझाने पर भी वे ऊलजुलूल बककर फर्श पर बैठ गई। जो कि भाजपा का ब्रह्मास्त्र है। पार्षद के न मानने पर आयुक्त को मजबूरीवश पुलिस बुलानी पड़ गई। उक्त पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस की पूरे शहर में खूब छीछालेदर हुई। बतलाया जा रहा है कि महिला पार्षद मंत्री गुट से सम्बंधित है परन्तु वर्तमान में विधायक की तूती बोल रही है।








