🔴दो सगे भाइयों की कमरे में फांसी पर झूलते मिली लाश, जांच में जुटी चक्रधरनगर पुलिस🔴मौके से मिला है एक सुसाइड नोट सभी पहलुओं पर जांच जारी🔴
थाना प्रभारी चक्रधरनगर निरीक्षक अभिनव कांत सिंह को केलो विहार में दो सगे भाइयों द्वारा कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की सूचना मिली थी । सूचना पर तत्काल थाना प्रभारी अपने स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे । जहां मृतक के परिजनो एवं आसपास निवासरत लोगों की भीड़ लगी थी । मृतक का चचेरा भाई वहां उपस्थित था जिसने बताया कि दोनों मृतक सगे भाई हैं । बड़ा अविनाश चौधरी पिता श्याम चौधरी उम्र 32 वर्ष दूसरा हरे कृष्ण चौधरी उम्र 22 वर्ष दोनों ग्राम पाता डोलेसरा थाना तमनार के मूल निवासी है । इन लोगो ने चक्रधरनगर केलो विहार में भी मकान बनवाया हैं। जिसमें दोनों भाई ही रह रहे थे । इनके पिता श्याम चौधरी उद्योग निरीक्षक के पद पर बिलासपुर में कार्यरत हैं तथा परिवार के अन्य सदस्य ग्राम पाता डोलेसरा में रह रहे हैं । चचेरे भाई ने यह भी बताया कि मृतक हरे कृष्ण दिमागी रूप से कमजोर था, उसका पूर्व में रांची में ईलाज कराये थे । मृतक अविनाश चौधरी जेपीएल तमनार में इंजीनियर के पद पर कार्यरत था । आज सुबह अविनाश की 7:00 बजे “ए” शिफ्ट में ड्यूटी थी । आज अविनाश ड्यूटी पर नहीं गया था, घर वाले सुबह इनसे बात किये थे , दोपहर 12:40 तक बातें हुई थी । उसके बाद दोनों का मोबाइल बंद बताया जाने लगा था । तब अविनाश का चचेरा भाई शाम 4:00 बजे तमनार पाता से चक्रधरनगर केलो विहार आया, मकान के बाहर का दरवाजा ताला बंद था । चचेरा भाई दीवार फांद कर मकान में जाकर देखा तो उसे दोनों भाई का शव छत में फांसी पर लटका हुआ दिखा । आनन-फानन में पड़ोसियों को बताते हुए थाना चक्रधरनगर को सूचना दी गई। सूचना पाकर थाना प्रभारी अपने स्टाफ के साथ घटना स्थल पर पहुंचे। जहां कमरे में एक सुसाइड नोट मिला।जिसमें आत्महत्या करने का जिक्र है । सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी मर्जी से आत्महत्या एवं परिजनो को तंग न करना लिखा है। बरहाल चक्रधरनगर पुलिस इस अनोखी आत्महत्या के कारणों को हर दृष्टिकोण से खंगाल रही है। इस घटना का महत्वपूर्ण क्लू यह है कि उनके घर के बाहर से ताला किसने लगाया ? मृतकों का चचेरा भाई बाहर से ताला लगे होने के बावजूद किस आधार पर पेड़ के सहारे चढ़कर या दीवार फांदकर क्या देखने घर के अंदर दाखिल हुआ ? उसे किसी बड़ी अनहोनी की आशंका कैसे हुई ?पुलिस के पहुंचने से पहले वह घर के अंदर क्यूँ दाखिल हुआ ? क्या सुसाइड नोट की राइटिंग मृतक दोनों भाइयों की राइटिंग से मेल खा रही है? जब मृतकों की बातें 12.40 तक हुई थी तो उनका चचेरा भाई 4 बजे तस्दीक के लिए रायगढ़ क्यो पहुंच गया ? जबकि तमनार से रायगढ़ आने में घण्टा भर तो लग ही जाता है। इतनी क्या हड़बड़ी थी ? साथ रह रहे दोनों भाइयों के आपसी सम्बन्ध कैसे थे? बरहाल इन सब बातों का खुलासा करने में अभिनवकान्त की टीम लगी हुई है। जिसका खुलासा शीघ्र होने की आस है।





