रायगढ़ जिले का बहुत चर्चित लोकप्रिय सर्वाधिक पढ़े जाने वाला नंबर वन की तरफ तेजी से बढ़ रहा *टूटी कलम समाचार* पत्रकारिता करना हमारा शौक है, जुनून है, आदत है, दिनचर्या है, कमजोरी है,लगन है,धुन है, पागलपन है ,पत्रकारिता करना हमारे पेट भरने का साधन नहीं है, और ना ही ब्लैकमेलिंग, धमकी,चमकी,देकर, विज्ञापन के नाम पर उगाही,वसूली करने का लाइसेंस मिला हुआ है, संपादक टिल्लू शर्मा लेखक, विश्लेषक, कवि,व्यंगकार,स्तंभकार, विचारक, माता सरस्वती का उपासक,परशुराम का वंशज,रावण भक्त,कबीर से प्रभावित,कलम का मास्टरमाइंड, सही और कड़वी सच्चाई लिखने में माहिर, जहां से लोगों की सोचना बंद कर देते है हम वहां से सोचना शुरू करते है, टिल्लू शर्मा के ✍️समाचार ज्यों नाविक के तीर,🏹 देखन म छोटे लागे, घाव करे गंभीर, संघर्ष और विरोध जितना अधिक होगा सफलता उतनी शानदार होगी, टिल्लू शर्मा नाम ही काफी है तुम अपनी जलन बरकरार रखो हमारा जलवा बरकरार रहेगा, इलाका किसी का भी हो धमाका हमारा ही होगा, हम तक पहुंचने के लिए अपनी लाइन बड़ी करनी पड़ेगी, शेर के पांव में कांटा चुभ जाने पर कुत्ते जंगल पर राज नहीं करते हैं.✍️✍️✍️✍️✍️
🔱टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम 🎤 न्यूज रायगढ़ छत्तीसगढ़ 🌍………….रायगढ़ पुलिस द्वारा सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने एवं यातायात नियमों के प्रति जनजागरूकता के उद्देश्य से दिनांक 01.01.26 से 31.01.26 तक “राष्ट्रीय मानव सुरक्षा माह 2026” मनाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत जिलेभर में विविध जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आज दिनांक 29.01.26 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायगढ़ शशि मोहन सिंह के दिशा निर्देशन में डीएसपी साधना सिंह के नेतृत्व में महिला पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों एवं प्रतिष्ठित महिला समूह “दिव्य शक्ति रायगढ़” के सदस्यों द्वारा हेलमेट जागरूकता रैली निकाली गई।
प्रतिवर्ष की जाती है इसी तरह की नौटंकी… यातायात विभाग के द्वारा प्रति वर्ष एक माह के लिए सड़क सुरक्षा का आयोजन किया जाता है। जिसमें तरह-तरह से लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाता है। स्कूल,कॉलेज के बच्चों पुलिस विभाग, यातायात विभाग, कुछ समाजसेवी संस्थाओं, बाइक शोरूम के कर्मचारियो, के द्वारा से नजदीकियां बनाने का प्रयास किया जाता है। यातायात जवानों, पुलिस के अधिकारी कर्मचारी समाज सेवी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं, पत्रकारों के द्वारा हेलमेट लगाकर बाइक रैली निकल जाती है और अनेक स्थानों पर निशुल्क वितरण किया जाता है। मगर सबसे बड़ी विडंबना यह है कि समाज सेवी संस्थाओं के सदस्य, पुलिस कर्मी मीडिया कर्मी स्वयं हेलमेट का उपयोग नहीं करते हैं और जितने हेलमेट वितरण किए जाते हैं उनको अपने अपने घर ले जाकर इकट्ठा कर लेते हैं। सभी के यहां एक दर्जन से कम हेलमेट से कम नहीं पाए जाएंगे. जब तक समाज सेवी कार्यकर्ता पुलिस वाले पत्रकार हेलमेट का उपयोग नहीं करेंगे तब तक कोई भी सफलता नहीं मिल पाएगी।

