रायगढ़—– विस्मित, अचंभित,हथप्रभ,चिंतित, शोकग्रस्त है रोशन भाई के चाहने वाले समर्थक भी विरोधी भी,फर्श से अर्श तक पहुंचने वाले रोशन भाई ने जीवन के खट्टे— मीठे अनुभव लेकर शिवलोक गमन कर गए। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि एक अनुशानप्रिय,बेहद सुलझे दिमाग के राजनीतिक के चाणक्य रोशन भाई महज सीढ़ी से गिरकर घायल होकर जंग हार जायेंगे। नीचे से उठकर प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान अपने संघर्षों के दम पर बनाने वाले रोशन भाई एक ऊर्जावान इंसान थे। आत्म विश्वास से लबरेज रोशन भाई को चाहने वालो की कमी नहीं है। अख्खड़ शैली उनकी अलग ही पहचान थी।आमजन हो या सरकारी अधिकारी,कर्मचारी,नेता,कार्यकर्ता सबके दिलों में उनके प्रति आदर्श भाव था।
रोशन भाई का पूरा जीवन मृत्यु होने तक संघर्ष में ही गुजर गया। पुराना सदर बाजार के बेहद सामान्य परिवार में जन्मे रोशन भाई ने बाल्यकाल के स्कूली समय मे टाउनहाल स्कूल में बोरा बिछाकर गोली, बिस्किट,जीराबट्टी,गटागट,पोंगा पंडित आदि बेचा करते थे। बाद में गद्दी चौक पर गुपचुप,चाट ठेला लगाया करते थे। लेकिन इस दौरान भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी थी। कुछ वर्षों बाद उन्होंने “मनचली”पीसे मसालो का कार्य किया। राजनीति में राष्ट्रीय सेवक संघ का दामन थामकर वे शाखा के सदस्य बन गए। कांग्रेस शासनकाल में सरकार का विरोध करने वाले गिने चुने लोगो मे एक थे रोशन भाई। पारिवारिक पृष्ठभूमि व्यवसायिक होने के बावजूद उनका मन व्यवसाय में नही लगा। उनके भाइयो ने “गृहस्थी स्टोर”,टॉप स्टोर नाम से व्यवसाय जमा लिया। इधर रोशन लाल ने जनता पार्टी हलधर किसान का झंडा थाम लिया।
खरसिया के उप चुनाव में उन्होंने मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व.कुंवर अर्जुन सिंह के खिलाफ उन्होंने सफल सेनापति की भूमिका अदाकर जनता पार्टी के प्रत्याशी स्व.दिलीप सिंह जूदेव को जीत के मुहाने पर पहुंचा दिया था। इसके बाद से रोशन लाल का राजनीतिक ग्राफ बहुत बढ़ा। पूर्व प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी वाजपेयी, स्व.पी के तामस्कर,स्व.दिलीप कुमार सिंह जूदेव,स्व.लख्खीराम आदि के नव रत्नों में से एक थे रोशन भाई।
जिले में भाजपा की तिकड़ी में एक थे रोशन भाई,जिले की भाजपा राजनीति में स्व.जयदयाल बेरीवाल, पूर्व विधायक विजय भैया,गिरधर गुप्ता,गोपाल शर्मा खरसिया,सुगनचंद फरमानिया,गुरूपाल भल्ला,बीरबल गुप्ता आदि में सबसे ज्यादा प्रभावशाली व्यक्ति स्व.रोशन भाई ही थे।
अपने समर्थकों,परिचितों की किसी भी समस्या के समाधान के लिए किसी से भी भीड़ जाना उनकी फितरत थी। सिटी कोतवाली के सामने “वर्षा लाज” का कार्य उनको रास नही आया क्यूंकि यही उनकी मंजिल नही थी। कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश ने उनको रायगढ़ का विधायक बना दिया। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रह निर्माण मण्डल के अध्यक्ष बनने के बावजूद उन्होंने कोई फायदा नही उठाया।
कुछ दिन पूर्व ही महज 137 वर्ग फिट जमीन की नीलामी में सबसे ज्यादा बोली 40 लाख बोलकर उन्होंने सबको चौका दिया था।शायद उन्होंने भविष्य के लिए कोई योजना बनाई होगी। इसी तरह से भगवानपुर होटल श्रेष्ठा की बाजू की जमीन के लिए सर्वाधिक बोली भी रोशन लाल ने लगाई थी। उनकी मंशा अपने एकलौते पुत्र “गौतम” के लिए कुछ करने की रही होगी।
रोशन भाई के लिए लिखने को बहुत कुछ बाकी है परंतु वे ऐसे व्यक्ति थे कि उनको स्व.लिखने के लिए हाँथ कांपने लगे है। रोशन भाई तो चले गए और यादें ही शेष छोड़ गए। उनके चुनाव के समय बिताया गया हर दिन अब याद आने लगा है। अतः रोशन भाई को “टूटी कलम परिवार की तरफ से अश्रुपूरित श्रध्दांजलि🙏🙏🙏







