रायगढ़——इस बार चेंबर के होने वाले चुनाव प्रतिष्ठा की दृष्टि से लड़े जा रहे है। लोकलुभावन वायदे के घोषणापत्र दोनो ही पैनल व्यवसाइयों को देकर लालीपाप थमा रहे है। लगता तो यह है कि यह चुनाव व्यवसाइयों का न होकर भाजपा और कांग्रेस के बीच लड़ा जाने वाला महासंग्राम बनता जा रहा है।प्रदेश स्तर पर “जय व्यापार पैनल एवं “एकता पैनल” के प्रत्याशी घूम घूम कर अपने अपने पक्ष में मतदान करने के लिए साम,दाम,की नीति अपनाकर हाड़तोड़ मेहनत कर रहे। इस बार ऐसा परिलक्षित हो रहा है कि व्यवसाइयों का भी कोई संगठन भी सांसे ले रहा है परन्तु यह कड़वा सच है कि रायगढ़ शहर में महज 350 के करीब व्यवसायी ही चेम्बर के सदस्य है। जबकि शहर में हजारों व्यवसाइयों की संख्या है। चेम्बर ने 20 साल से व्यवसाइयों को सदस्य बनाया ही नही है। जिसके पीछे बहुत बड़ा कारण माना जाता है। पद लोलुप पदाधिकारी नही चाह रहे थे कि चुनाव करवाये जाये ताकि वे अपने पदों पर कुंडली मारकर विराजमान रह सके। चेम्बर एक जेबी संस्था बनकर रह गई है और अंगुलियों पर गिने जाने वाले घिसे पिटे लोग ही इसका भरपूर शोषण कर रहे है।
पूरे जिले भर में नही है हजार सदस्य भी फिर भी फूंके जा रहे करोड़ो रूपये —- इसे चेम्बर की अकर्मण्यता कहें या फिर स्वार्थ सिद्धि योग कहें कि 20 वर्ष बीत जाने पर सदस्यों की संख्या न बढ़ाना कहीं न कहीं स्वयं की कुर्सी डोलने का भय रहा होगा। महज 400 वोटर ही प्रदेश उपाध्यक्ष, महामंत्री पद के लिए मतदान कर सकेंगे। बाकी व्यवसायी घण्टी बजाते रहेंगे।
क्या केवल मॉल वाले,उद्योगपति, बड़े ठेकेदार, ही चेम्बर की सदस्यता पा सकते है। साग,सब्जी,ठेले,खोमचे,फल,राशन,मनिहारी,पान,दवाई आदि का व्यवसाय करने वाले क्या व्यापारी की श्रेणी में नही आते। अगर आते है तो मतदान से वंचित क्यो किया जा रहा है। अगर नही आते है तो हड़ताल,शहर बंद रखने के लिए उनसे सहयोग क्यो मांगा जाता है।
खैर अब अगले दिन चुनाव होने है। जिसमे लोग अपनी अपनी राय दे रहे है। अगर एक्जिट पोल देखा जाए तो “कलश” छाप “दिया छाप” से आगे निकल रहा है परन्तु कुछ स्वार्थ सिद्ध लोग अपना उल्लू सीधा करने के लिए दो नावों पर सवार होकर बैलेंस बनाने की जुगत में जुटे हुए है। जो जय व्यापार पैनल,व्यापारी एकता पैनल दोनो से मलाई खाने के जुगाड़ कर लिए है।





