रायगढ़—– रायगढ़ कांग्रेस में आपसी कलह समय समय पर खुलकर सामने आती रहती है। चाहे वह पूर्व प्रधानमंत्री स्व.इंदिरा गांधी, स्व.राजीव गांधी की जन्मतिथि,पुण्यतिथि का अवसर हो। एक गुट ने इंदिरानगर में तो एक गुट ने कांग्रेस कमेटी कार्यालय में कार्यक्रम कर अपने अपने मतभेद जाहिर कर दिए थे। इसी तरह से निगम आयुक्त वर्सेस सभापति के वाकयुद्ध के दौरान भी मुख्यमंत्री से शिकायत करने गए कांग्रेसी पार्षदों में 2 फाड़ दिखलाई दी थी। 25 पार्षद होने के बावजूद रायपुर 14 पार्षद ही गये थे। जिनमें से कुछ मुख्यमंत्री से मुलाकात के समय नदारद हो गए थे। बजट पेश करने में पार्षद का इंकार, पूर्व सभापति का बैठक से वाकआउट से कहा जा सकता है की भाजपा के अच्छे दिन आ सकते है।
जानकी ने लिखा शिव को पत्र— इन दिनों कांग्रेसी महिला महापौर जानकी के लेटरपेड में नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया को लिखे गये तथाकथित पत्र में आयुक्त आशुतोष पांडेय की शान में जमकर तारीफ करते हुए एमआईसी के मेम्बरों की शिकायतें की गई है। यहां तक कि विधायक प्रकाश नायक के बैठक के दौरान उपस्थित रहने पर भी नराजगी व्यक्त की गई है।
सभापति एवं ठेकेदारों के बगैर नाम लिखे शिकायत करना किसी चतुर सुजान का कार्य हो सकता है। जो नगर पालिका निगम को नरक पालिका में तब्दील कर बगैर पैसे का मुफ्त में मनोरंजन करना चाह रहा होगा। महापौर को चाहिए कि इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज करवाकर जांच करवाई जानी चाहिए ताकि लेटरपेड चोरी होने और उनके दस्तखत की हैंडराइटिंग विशेषज्ञ से मिलान करवाने की मांग की जानी चाहिए। जानकी बाई द्वारा लिखे गए पत्र में यह विशेषता है कि उसमें दिनांक अंकित करना भूल गए हैं।

आशुतोष जहां भी रहेंगे अधिकारी ही रहेंगे—– कांग्रेस का एक घड़ा निगम कमिश्नर के तबादला करवाने पर प्रयासशील है परन्तु कमिश्नर के सम्बंध सीधे हाई लेबल पर है और यदि काफी मिन्नतों और गिड़गिड़ाने के बाद इनका तबादला करवा भी दिया जाता है तो वे जहां भी जायेंगे तो रहेंगे अधिकारी के पद पर ही । निगम आयुक्त से पूर्व वे अतिरिक्त कलेक्टर, जिला पंचायत सी ई ओ पद पर रह चुके है। उनके तबादले से रायगढ़ में चल रही विकास की हवा जरूर थम सकती है। सन 2021 का शहर का मास्टर प्लान किसी गोदाम में दबा दिया जा सकता है।






