
@टिल्लू शर्मा ▪️टूटी कलम डॉट कॉम# भला कौन कलेक्टर,निगम आयुक्त अलसुबह उठकर प्रत्येक दिन वार्डो का दौरा कर नालियों,सड़को,गलियों की सफाई व्यवस्था देखने निकलते है ?रायगढ़ को स्वच्छता मामले में राष्ट्रीय स्तर पर 5वां स्थान,प्रदेश स्तर पर 2रा स्थान जनप्रतिनिधियों के प्रयास से नही अपितु प्रशासनिक अधिकारीयो की वजह से मिला है।भीमसेनी प्रयास,आशुतोष के तीसरे नेत्र खोलने से ही रायगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर ऊंचा हुआ है। भले ही कोतरारोड बाईपास, मरीन ड्राइव,रामपुर आदि मार्ग बदहाल शहर की सड़कें गढ्ढे युक्त, कटी फटी क्यूँ न हो,जिसके जिम्मेवार जनप्रतिनिधि एवँ फिर उनके प्रतिनिधि ही तो है।शासकीय अमला ध्यान न दे तो,पूरा शहर मुन्ना भाई कबाड़ वाले के सुपुर्द कर देंगे जनप्रतिनिधि
चैतन्य नगर से लेकर बजाज शो रूम तक की डिवाइडर में लगी ग्रिल चोरी हो चुकी है। मौका मुआवना क्यो नही करते ? लाईट,एक्शन,कैमरा,कट वाले ? टूटी कलम
लोवर,टी शर्ट पहनकर 5 लाख कदम से शहर के 48 वार्ड नाप दिए कलेक्टर एवं कमिश्नर ने….जिले एवं शहर के आला अधिकारियों की जोड़ी ने कोरोना काल,लाकडाउन के समय प्रत्येक दिन शहर के एक वार्ड का पैदल भ्रमण कर बजबजाती,टूटी फूटी नालियो की सुधि लेकर साफ सफाई का महाअभियान चलाया जो निरंतर 60 दिन के आसपास तक जारी रहा। तंग से तंग गलियों के भीतर ये अधिकारी पहुंच गए एवं आमजनो को अपने वार्ड को साफ सफाई रखने के संदेश देकर निगम कर्मचारियों को प्रतिदिन कचरा ढ़ोने वाले रिक्शे को गलियो के प्रत्येक घर से कचरा लेने के आदेश दिए गए थे। टूटी कलम
सुबह 10 बजे के बाद अपने कार्यस्थल पर उपस्थित हो जाते थे दोनो अधिकारी….जब पूरा शहर मीठी नीद ले रहा होता था तब ये लोग वार्डो का निरीक्षण कर रहे होते थे। जब जनप्रतिनिधि सुबह सोकर उठते थे। तब तक ये लोगो अपने अपने कार्यालयों में बैठकर दिनभर के कार्यो को निपटाने में लग जाते थे। कलेक्टर भीम सिंह का एक पैर धरमजयगढ़ तो दूसरा पैर सारंगढ़ में होता था। इन पर कोविड़19 से जिले वासियो को बचाये रखने की भी जिम्मेवारी थी। क्वारेंटिन सेंटरो,मेडिकल कॉलेज, अस्पतालों,नर्सिंग होमो,आदि में बेड,आक्सीजन,दवाई,भोजन,टीकाकरण,सभी की उपलब्धता की जिम्मेदारी के बावजूद कलेक्टर को कभी किसी ने न थके देखा,न मानसिक तनाव में देखा। शहर के उक्त स्थानों में भर्ती मरीजों के नाश्ते,भोजन आदि की व्यवस्था कमिश्नर ने बखूबी से संचालित करी। टूटी कलम
डेंगू के दंश का असर खत्म सरीखा हो गया…..नालियो की,वार्डो की सफाई,दवा के छिड़काव के कारण आशंकित डेंगू मच्छर के लार्वा नही पनप पाया। जिस वजह से कुछ मरीजो की ही पहचान डेंगू रोगी के रूप में सामने आई। डेंगू को कोरोना से ज्यादा घातक माना जाता है। टूटी कलम








