@टिल्लू शर्मा▪️टूटी कलम डॉट कॉम#रायगढ़….भाजपाइयों की शेरनी की उपाधि धारी तेजतर्रार आदिवासी महिला सांसद गोमती साय से आदिवासी समाज के इन दिनों काफी नाराज चलने के समाचार है। जिसका कारण जिले भर में बिक रही आदिवासियों की जमीनें एवं रसूखदारो के द्वारा जबरन कब्जा कर लिया माना जा रहा है। उद्योगों ने पहले ही आदिवासियों की हजारों एकड़ जमीने जबरिया हथियाकर उद्योगों का विस्तार कर दिया गया है। गांवो,जंगलो की भी आदिवासियों की जमीनों पर निरंतर बलपूर्वक कब्जे किये जा रहे है। नगर पालिका निगम क्षेत्र में इन दिनों आदिवासियों की जमीनों की खरीद फरोख्त इस कदर हो रही है कि आने वाले समय मे सारी जमीने गैर आदिवासियों की हो जाएगी इसमें कोई शक सुबह नही है। आदिवासियों की जमीनों को बिकवाने गाँव, गांव,गली,गली जमीन दलाल सक्रिय हो चुके है। जो महंगी जमीनों को सस्ते में खरीद कर ऊंचे दामों में बेचकर चांदी काट रहे है। नजूल विभाग की मनमानी भी चरम पर है। जो मोटा नजराना झोंककर आदिवासियों की जमीनों को गैर आदिवासियों के नाम करने में बढ़ चढ़कर भूमिका निभा रहे है। शहर की कालोनियों में भी आदिवासियों की जमीनों को कब्जा कर निर्माणकर मकान,फ्लैट,भूखण्ड बेचे जा चुके है। टूटी कलम
यह सब गोरखधंधा एक एक व्यक्ति जान रहा है और इस बात से भी इंकार नही किया जा सकता कि इसकी खबर आदिवासी महिला सांसद गोमती साय के कानों तक न पड़ी हो। सांसद के स्वयं के आदिवासी होने के बावजूद आदिवासियों की जमीने बिक रही है। नामांतरण किया जा रहा है। जिसपर शेरनी की दहाड़ चुप्पी में बदल जाना समझ से परे है।जिसका प्रत्युत्तर अगले लोकसभा चुनाव के समय आदिवासी समाज दे सकता है। टूटी कलम








