पर्यावरण की बलि देकर एनआर इस्पात करेगा अपना विस्तार..कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच 5 जनवरी को है जनसुनवाई..ग्रामीणों के विरोध को किया जा रहा दरकिनार
✒️ टूटी कलम रायगढ़ औद्योगिक नगरी के रूप में पूरे देश में अपनी साख बनाने वाला रायगढ़ विकास के कई कीर्तमान रच रहा है। इस विकास की एक बड़ी कीमत जिले ने चुकाई है और वह चुका भी रहा है। इसके बाद भी उद्योगपतियों का पेट नहीं भर रहा है। कांक्रीट के जंगल और चिमनियों की अतिरेक ने यहां की फिजा में विष घोल दिया है। पर्यावरण व औद्योगिक सुरक्षा विभाग के नाक नीचे उद्योग विभाग की शह पर निजी कंपनियां खुलेआम पर्यवारणीय नियमों को तार-तार कर रही हैं। टूटी कलम
बीते कुछ सालो में यह देखा गया है कि कम क्षमता के प्लांट जान बूझकर खोले गए हैं और फिर कुछ दिन बाद इसी क्षमता से कई गुना क्षमता का विस्तार एक सोची समझी साजिश के तहत किया जा रहा है। क्योंकि शुरुआत में प्लांट की क्षमता के आधार पर अधिक दिक्कतें आती हैं। इसका ताजा उदाहरण हैं गौरमुड़ी के सागौन के जंगलों के बीच स्थापित उद्योग एनआर इस्पात एंड पावर लिमिटेड जिसकी लोक सुनवाई 5 जनवरी को रखी गई है। इसके इंडक्शन फर्नेश की वर्तमान क्षमता 48 हजार टन प्रतिवर्ष है जिसे 7 लाख 8 हजार टन प्रतिवर्ष करने का कंपनी का इरादा है। ऐसा ही पावर प्लांट सेगमेंट में है जहां कंपनी वर्तमान में डब्ल्यूएचआरबी और एफबीसी मिलाकर 8 मेगावाट बिजली का उत्पादन करती है जो अब 90 मेगावाट के लिए विस्तार कर रही है। ऐसा कंपनी के हर क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हो रही है। जिससे कंपनी के इर्द-गिर्द के गौरमुड़ी, देलारी, लाखा, गदगांव, सराईपाली, तराईमाल, तुमीडीह, गेरवानी, भुईकुर्री, सामारूमा गांव पूर्ण रूप से प्रभावित होंगे। टूटी कलम
विदित हो कि इन ग्राम के आसपास इमारती वन हैं। जिन्हें एक समय योजना के तहत वन विभाग ने ही रोपित किया था। बाद में इन वनों का विस्तार होता गया। एक अनुमान के मुताबिक लाखों सागौन, साल,सरई और बीजा जैसे पेड़ों से आच्छादित वन हैं। टूटी कलम
कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर की चर्चा और नए वैरियंट ओमीक्रान के बढ़ते प्रकोप के बीच अगले महीने होने वाली जनसुनवाई पर भी विरोध शुरु हो चुका है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कोरोना संक्रमण रोकने हेतु कोविड अनुरूप व्यवहार का अनुपालन भी कंपनी द्वारा नहीं किया जा रहा है। टूटी कलम
ऐसा होगा एनआर का विस्तारित प्लांट
मेसर्स एनआर इस्पात एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड ग्राम गौरमुड़ी तहसील तमनार के विस्तार की लोक सुनवाई 5 जनवरी 2022 को सुबह 11 बजे राजा मैदान ग्राम देलारी में आयोजित की जाएगी जिसमें न्यू आयरन ओर बेनिफिशियल प्लांट क्षमता 12 लाख 50 हजार टन प्रतिवर्ष, न्यू आयरन ओर पेलेट प्लांट क्षमता 9 लाख टन प्रतिवर्ष, स्पंज आयरन मैनुफैक्चरिंग कीलन क्षमता 60 हजार से बढ़कर 4 लाख 56 हजार टन प्रतिवर्ष, इडक्शन फर्नेश मशीन के साथ 48 हजार टन प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 7 लाख 8 हजार टन प्रतिवर्ष, न्यू रोलिंग मिल जिसकी मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता 6 लाख 60 हजार टन प्रतिवर्ष, न्यू फैरो एलायस मैनुफैक्चरिंग यूनिट 50 हजार 400 टन प्रति वर्ष, डब्ल्यूएचआरबी आधारित पावर प्लांट 4 मेगावाट से बढ़ाकर 34 मेगावाट, एफबीसी आधारित पावर प्लांट 4 मेगावाट से बढ़ाकर 24 मेगावाट, न्यू फ्लाईएश ब्रिक्स मैनुफैक्चरिंग यूनिट 66 हजार ब्रिक्स प्रतिदिन की स्थापना के लिए पर्यावरण स्वीकृति हेतु लोक सुनवाई के लिए आवेदन किया है। टूटी कलम
फर्जी ईआईए रिपोर्ट के आधार पर धूल झोंकने की कोशिश
जिस गौरमुड़ी ग्राम में एनआर ग्रुप के प्लांट का विस्तार किया जा रहा है वह पूर्व से ही भयंकर प्रदूषणकारी क्षेत्र माना जाता है। इस क्षेत्र में स्थापित उद्योगों के लिए कई बार सामाजिक संगठन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) तक पहुंचे कई मामलों में प्लाटं प्रबंधकों को लाखों रूपये का अर्थदंड देना पड़ा। एनजीटी ने खुद माना कि तराईमाल, गेरवानी और गौरमुड़ी का इलाका जिले का सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में है। बावजूद इसके पर्यावरण विभाग के शह पर उद्योगों के विस्तार की अनुमति दी जा ही है। चूंकि लोक सुनवाई अनुमति मिलने की औपचारिकता है इसलिए 5 जनवरी को यह रस्मअदायगी भी कर दी जाएगी। जब इतने दांव-पेंच पहले से ही कंपनी के विस्तार वाली जगह पर है तो यह तय है कि कंपनी फर्जी तौर पर ईआईए रिपोर्ट तैयार किया है। टूटी कलम
ग्रामीणों के विरोध को किया जा रहा दरकिनार
एक समय लोग पैदल बंजारी धाम इसी लाखा-गेरवानी मार्ग से जाते थे और आज लोग कार में भी जाने से कतराते हैं। क्योंकि उद्योगों की गाड़ियों की रेलम-पेल और अंधाधुंध प्रदूषण ने हादसों को बढ़ा दिया। यह मौत की सड़क नाम के कुख्यात है। जब लोगों को वहां जाने से रोक दिया तो आप इन प्लांट के आसपास रहने वाले लोगों की नारकीय जीवन की कल्पना कर सकते हैं। नए उद्योग और विस्तार की नाम से ही यहां लोग कांप उठते हैं कि अब फिर से एक नई बीमारी और पीढ़ियों को नाश करने वाले रोग उन्हे लगेंगे। लोग विरोध करते हैं पर उनकी न तो प्रशासन सुनता है और न ही जनप्रतिनिधि। सभी अपने-अपने हिस्से की मलाई चाटकर चाटुकारिता में व्यस्त हो जाते हैं और उद्योग और उससे होने वाले विकास का भाषण-निबंध-स्लोगन शुरू कर देते हैं। सवाल यह है कि हमें कितना विकास चाहिए और किस कीमत पर और कब तक।





