✒️ टिल्लू शर्मा टूटी कलम रायगढ़ … थाना प्रभारियों ने काफी ज्यादा मेहनत कर मीडियाकर्मियों के बीच खाई खिंचने का किया गया कार्य सफलता के कदम चूम रहा है। जो जितना बड़ा चापलूस,चाटुकार,चरणरज को माथे पर लगाने वाला,पुलिस के लिए मजबूत सूचनातंत्र का कार्य करने वाला मीडियाकर्मी वह उतना ही बड़ा कृपापात्र है। सभी थानों के चक्कर काटने वाले,धक्का खाने वाले, बेइज्जती को भी प्रेम जतलाने वाले भौकाल किस्म के लोग पुलिस के करीबी एवं पालतू समझे जाते है। पुलिस की फेंकी गुगली से पत्रकारों में रोष तो जरूर पनपने लगा है परन्तु विरोध करने से भी पापी पेट का सवाल खड़ा हो जाने की वजह से कड़वे घूंट को भी चासनी समझकर पी जाते है । टूटी कलम
डीएसआर के कई ग्रुप क्रियाशील हो चुके है पूर्व पुलिस अधीक्षक डी जी दुर्गेश माधव अवस्थी के कार्यकाल के समय मीडियाकर्मियों के थानों में चक्कर काटने एवँ पीछा छुड़वाने के कारण डीएसआर को अस्तित्व में लाया गया ताकि इसके माध्यम से पुलिस जिस तरीके से चाहे अपनी कार्रवाई को बढ़ा चढ़ाकर वायरल कर मीडिया में छा जाये। जिसके बाद से मीडिया वाले तो आखिर मीडिया वाले है। जो डीएसआर को शब्दशः प्रसारित कर देते है। हैडिंग्स तक बदलने की जहमत न उठाने वालो को भीतरी समाचार से भी मतलब नही रहता कि अंदर के समाचारों में कुछ कमियां या त्रुटि को भी सुधार कर लिया जाए भले ही अंदर लड़की की जगह लकड़ी ही क्यों न लिखा हो. टूटी कलम
पुलिस ने चिह्हाँकित कर लिए कुछ चेहरे…भूसे में से सुई को खोज निकालने वाली पुलिस ने कुछ चेहरो को चिह्हाँकित कर रखा है कि जो शब्दशः पुलिस के समाचारों को ब्रेकिंग के रूप में चला सके। जिन्हें सबसे पहले सूचना दे दी जाती है कि पुलिस घटना स्थल पर पहुंच रही है आप भी कवरेज करने पहुंच जाओ और मीडिया कर्मी पिठ्ठू बैग टांगे,हांथो में मोबाईल टांगे पुलिस के पहुंचने से पहले पहुंचकर इस तरह का रियेक्ट करते है मानो मीडिया पुलिस की वेतनभोगी शाखा है। जबकि मीडिया का कार्य दर्पण दिखलाना होना चाहिए ना कि चरण वंदना करना होना चाहिए। कुछ मीडिया वाले पुलिस ग्रुप में जुड़ने के लिए इतनी मिन्नते करते,कानो में फुसफुसाते दिखलाई पड़ते है।जिन्हें देखकर सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस का सूचनातंत्र का कार्य कौन कर रहे है। टूटी कलम
प्रेस कांफ्रेंस का समय 1 से 2 बजे के बीच…पुलिस शायद जानबूझकर किस भी मामले के खुलासे का समय मध्यान 1 बजे से 2 बजे के बीच भोजन के समय रखकर 4 बिस्किट,6 चिप्स,हाफ चाय की व्यवस्था कर मजे लुटती है। दोपहर 3 के बाद प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर केवल चाय परोसी जाए तो बेहतर होगा ताकि मीडियाकर्मी घर से ही भोजन कर पहुंचे आधा अधूरा नाश्ता करने नही.मीडिया वाले भी माईक थामे बाइट लेने इतनी आपाधापी मचा देते है मानो वे पीछे रह जायेंगे तो अधिकारी कैसे उन्हें पहचान पाएंगे। जबकि ली गई बाइट को किसी भी चैनल में न स्थान मिलता है और न प्रसारित किया जाता है। यदि अधिकारी अपने बाइट की कटिंग भेजने को बोल दे तो शायद सारे माईक आई डी हटा लिए जायेंगे। टूटी कलम
थाना प्रभारियों,पी आर ओ,ट्रेफिक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सबके अलग अलग ग्रुप बने हुए है। जो जिसका जितना फायदा,चरण वंदना,चापलूसी,चाटुकारिता करता है। वह स्वयं के लिये उतना बड़ा मीडियाकर्मी बन जाता है।







