✒️ टिल्लू शर्मा टूटी कलम रायगढ़… बदलते समय के सांथ पत्रकार की पहचान भी बदल गई है। पुलिस के सौजन्य से उपलब्ध हत्या,चोरी,डकैती,दुर्घटना, कोयला,कबाड़,धान,मवेशी,जुआ,सट्टा, गांजा, शराब,देहव्यापार आदि मामलों के समाचारों को कॉपी पेस्ट कर व्हाटसप ग्रुपो पर अतिक्रमण करने के तर्ज पर समाचारों को इधर से उधर कर वायरल रहना ही पत्रकारिता की पहचान बनकर रह गई है। चाहे कोई कितना भी पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर पत्रकारिता को बदनाम करने पर तुले हो परन्तु सही कलमकार की अलग पहचान,अलग छवि होती है। अधिकारियों,व्यवसाइयों,पाठकों के बीच,सही कलमकार यह सोचकर पत्रकारिता करता है कि उसकी कलम की धार को जिला,प्रदेश,राष्ट्र स्तर पर पहचान मिले ना कि शाम की पव्वा पेटी,200,500,₹ का जुगाड़ मिले। टूटी कलम
आजतक जितने पत्रकारों ने अन्तराष्ट्री,राष्ट्रीय,प्रदेश,जिला,नगर स्तर पर अपनी स्वयं की पहचान बनाई है। वे सब दूरदर्शी सोच,समस्या,समाधान,चिंतक,विश्लेषक आदि के लिए जाने पहचाने गए है। ना कि समाचारों की कॉपी पेस्ट कर पत्रकार कहलाये है। अपने वर्ग विशेष के लोगो की कंठी माला जपने वाले पत्रकार नही अपितु कुछ अन्य कहलाते है। पीठ के पीछे लोगो उनके प्रति क्या सोच रखते है। अगर सुन लेंगे तो पत्रकारिता से परे हट जायेंगे। पत्रकार का कार्य बहुत विस्तृत और जोखिम भरा होता है। सरकार,प्रशासन, को दर्पण दिखलाकर जन समस्याओं,समाधान से सरोकार रखने वाला ही कलमकार होता है। स्वास्थ्य,शिक्षा,सड़क,बिजली,पानी मूलभूत सुविधाओं के लिए लड़ने वाले पत्रकार कहलाते है। प्रेस की आड़ में अवैध धंधो को संचालित,उगाही,ब्लैकमेलिग, धमकी,चमकी देकर व्यवसाय करने वाले नही। टूटी कलम





