✒️टिल्लू शर्मा टूटी कलम रायगढ़…हमारा शहर ही नही अपितु पूरा प्रदेश विकास की करवट ले रहा है। विकास में बाधा उतपन्न न हो इसलिए भूपेश सरकार ने नजूल भूमि को बाजार मूल्य में 152% की वृद्धि कर बेचे जाने का स्वागतेय आदेश जारी किया है। जिसके कारण नजुलभूमि पर बगैर राशि पटाये कब्जाधारियों को जमीनों के मालिक बनने का अवसर प्रदान कर दिया। जिससे वर्षो से नजुलभूमि पर काबिज लोगो मे 152% पटाकर जमीनों को अपने नाम करवाने की होड़ सी मच गई। 10,000 रुपये की जमीन 15,200 रुपयों में बिकने लग गई। इस योजना से सरकार के राजस्व विभाग का कोष अप्रत्याशित रूप से भरने लगा एवं जबरिया जमीन पर कब्जा करने वाले भी मोटी रकम पटाकर जमीन के मालिक भी बन रहे है। टूटी कलम
छाता मुड़ा क्षेत्र की 1,16,61,000 रुपये की नजूल जमीन जिस पर शहर के रसूखदार बिल्डर्स ए आर ग्रुप ने कब्जा किया हुआ था। तत्कालीन पुसौर तहसीलदार “सुश्री माया अंचल” जिन्हें प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ तहसीलदार का खिताब दिया जा चुका है कि सूझबूझ एवं प्रमाणित दस्तावेजो के आधार पर बिल्डरों से उक्त भूमि 152% शुल्क लेकर सरकारी कोष में अतिरिक्त जमा करवाकर सरकार को फायदा पहुंचाया गया। इस भूमि वजह से सरकार को लगभग एक बार मे ही लगभग 1,500000 (डेढ़ करोड़) रुपयों की आमदनी हुई है और वह भी उस जमीन से जिसे किसी ने सपने में भी नही देखा होगा। टूटी कलम
उक्त भूमि नियमानुसार आर.आई के द्वारा प्रमाणित प्रतिवेदन को तहसीलदार “सुश्री माया अंचल” के कार्यालय से प्रतिवेदन नजूल अधिकारी,निगम कमिश्नर,अनुविभागीय अधिकारी, नगर एवं ग्राम निवेश ,कलेक्टर कार्यालय गया जहां कलेक्टर के संज्ञान में 152% लेकर बकायदा रजिस्ट्रार कार्यालय से रजिस्ट्री शुल्क पटाकर जमीन की रजिस्ट्री करवाई गई। ऐसा भी नही है कि मात्र तहसीलदार माया अंचल के हस्ताक्षर से जमीन का नामांतरण कर दिया गया है।जिस जमीन की कीमत गाइडलाइंस के अनुसार लगभग 440 रुपये होती है । वह 152% शुल्क पटाने पर 770 रुपये के हिसाब से 6 पारिवारिक सदस्यों ने नियमो के तहत खरीद ली। टूटी कलम
सारंगढ रेलवे क्रासिंग के उस पार के क्षेत्र जाने में किसी समय लोग डरते थे एवँ हिम्मत नही करते थे। आज यही क्षेत्र लोगो की पहली पसंद बन चुका है। फ्लाईओवर, गौरवपथ,चौड़ी सड़के,अस्पताल ,मल्टीप्लेक्स, जिम,लोगो के जीवन स्तर में सुधार,बढ़ता व्यवसाय, खुलते शोरूम,बैंक,होटल,हर वस्तुओं की बड़ी बड़ी दुकाने आदि पूर्व कलेक्टर अमित कटारिया की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण संभव हो पाया है। आज रेलवे फाटक के बाद कि भूमि काफी महंगी शायद इसी कारण से हो गई ,





