नाम छोटेलाल लेकिन कारनामे हैं बड़े बड़े…वनविभाग में जमाये बैठे हैं भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें… भाग -1

खरसिया वनपरिक्षेत्र के तत्कालीन रेंजर छोटेलाल डनसेना के कार्यकाल में लाखों रुपयों की हेराफेरी आई सामने…
रायगढ़।हाल ही में रायगढ़ वन मंडल अंतर्गत आने वाले खरसिया वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 1164 में एक बड़े घोटाले का खुलासा होने से हड़कंप मच गया जिसने कुछ दिन पूर्व ही स्थानांतरण किये गए डीएफओ प्रणय मिश्रा की रातों की नींद उड़ा दी ।बताया जाता है कि यह मामला लगभग वर्ष भर पुराना है जिसमे वनपरिक्षेत्र खरसिया अंतर्गत कक्ष क्रमांक 1164 में कैम्पा निधि से क्षति पूर्ति हेतु किये गये वृक्षारोपण की सिंचाई इत्यादि हेतु जलसंचय के लिए तीन डबरियों का निर्माण करवाया जाना था।समय महामारी के दौर का था तथा लॉक डाउन जैसी परिस्थितियों में अवसरवादिता भी हावी थी,इससे भला पहले से ही कमीशनखोरी में लिप्त वन विभाग के भ्रष्ट सेवक कैसे अछूते रहते, स्वर्णिम अवसर जान जमकर जँगल काटे गये, बिना कार्य कराये बिलों का भुगतान किया गया। इसी प्रकार के भ्रष्टाचार की श्रृंखला में रायगढ़ के जँगल विभाग में पायी जाने वाली भ्रष्ट प्रजाति के अफसरों में से एक वनपरिक्षेत्र अधिकारी छोटेलाल डनसेना ने उचित अवसर जान बिना डबरियों के निर्माण के ही लाखों रुपए के भुगतान की प्रक्रिया मार्च 2020 में पूर्ण करवा दी और सम्बंधित फर्म ने राशि का आहरण भी कर लिया। टूटी कलम
हिस्सेदारी में बंदरबांट पड़ गई भारी:-सूत्रों के अनुसार खरसिया वनपरिक्षेत्र अधिकारी रहते हुए छोटेलाल डनसेना ने वनविभाग के विभिन्न कार्यों में गफ़लत कर लाखों रुपयों की हेराफेरी की है।इस प्रकार की गई काली कमाई से हर बार की तरह सिस्टम के अनुसार बंटवारा होना चाहिए था लेकिन कमीशन के खेल में लंबी छलाँग मारने के चक्कर में कुछ काम ऊपर के अधिकारियों की नजरों से छुपाते हुए बिलों का भुगतान अपनी चहेते ठेकेदारों/फर्मो को दिलवा दिया।इस संभावना के साथ कि भविष्य में यदि कभी मामले का खुलासा हो तो संबंधित ठेकेदार से औने पौने काम करवा कर डैमेज कंट्रोल किया जा सके लेकिन इस बार छोटेलाल की कार्यशैली से खार खाये बैठे कुछ कर्मचारियों की हठधर्मिता से मामला उल्टा पड़ गया और शुरू हुआ खुद की गर्दन बचाने बलि का बकरा तलाशने का खेल।टूटी कलम
सहयोग की मुद्रा में वरिष्ठ अधिकारी लेकिन मातहतों से नहीं मिला सहयोग :- एसडीओ पहारे,डीएफओ प्रणय मिश्रा ने पूर्व में मीडिया को गुमराह करने के लिए ऊलजलूल तर्कों का सहारा लिया साथ ही विभाग के रायगढ़ एसडीओ को जाँच का जिम्मा सौंपा ताकि जांच में लगने वाले समय के दौरान मामला मैनेज किया जा सके लेकिन वर्ष 2015 से पदस्थ उप वनपरिक्षेत्र अधिकारी प्यारे लाल सिदार ने रायगढ़ दर्पण को बताया कि जब से वे यहाँ पदस्थ हैं तब से किसी भी प्रकार की कोई डबरी नहीं खोदी गई है यही नहीं यदि अब यदि डबरी खोदने का प्रयास किया जाता है तो वे पुरजोर विरोध करेंगे क्योंकि जेसीबी,ट्रैक्टर आदि मशीनों के प्लांटेशन एरिया में घुसने से बहुतायत में पौधे नष्ट हो जायेंगे। टूटी कलम
भ्रष्टाचार की वेदी पर जबर्दस्ती चढ़ाया गया बलि का बकरा ठेकेदार पर फूटा ब्लैक लिस्टेड होने का ठीकरा:-मामले की सुगबुगाहट तीव्र होने पर किसी अनजानी शिकायत के आधार पर हाल ही स्थानांतरित हुए डीएफओ प्रणय मिश्रा ने रायगढ़ एसडीओ को जाँच का जिम्मा सौंपा।सूत्रों के अनुसार जाँच के दौरान संबंधित ठेकेदार पर आनन फानन में डबरी खोदे जाने हेतु दबाव भी बनाया गया लेकिन मामला अब तक काफी तूल पकड़ चुका था अतएव यह प्रयास निरर्थक जाता देख तथाकथित भुगतान प्राप्त ठेकेदार/फर्म को किसी अन्य पुराने मामले में ब्लैक लिस्टेड किये जाने की अनुशंसा करते हुए मामले को रफादफा करने का प्रयास किया गया। टूटी कलम
क्या कहते हैं अधिकारी:-रायगढ़ दर्पण ने जब मामले की जानकारी लेने उच्चाधिकारियों से सम्पर्क करने की कोशिश की तो एसडीओ पहारे ने फ़ोन कॉल रिसीव करना गवारा न समझा वहीं डीएफओ प्रणय मिश्रा ने रायगढ़ दर्पण को बताया कि जाँच में पाया गया है कि कक्ष क्रमांक 1164 में कोई भी डबरी खुदाई नहीं कि गयी है।ठेकेदार ने अवैध रूप से राशि का आहरण किया है जिसके चलते ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड किया गया है एवं उसके विरुद्ध एफआईआर किये जाने की अनुशंसा भी की गई है। उनसे यह पूछे जाने कि बगैर भौतिक सत्यापन के निर्माण कार्यों के बिलों का भुगतान वनमंडल रायगढ़ अंतर्गत सम्भव है तो उन्होंने झुंझलाते हुए कहा कि हर जगह तो वे भौतिक सत्यापन के लिए नहीं जा सकते।
कुछ अनसुलझे सवाल :-1. क्या बगैर टेण्डर जारी हुए,कार्यादेश के किसी फर्म या ठेकेदार बिल प्रस्तुत कर सकता है?👉क्योंकि इस पूरे प्रकरण में इस बात का कहीं भी जिक्र नहीं आया है।
2.क्या निर्माण कार्य की फ़ाइल में प्रगति रिपोर्ट संबंधित कर्मचारी से नहीं ली जाती ? 👉 क्योंकि इस पूरे प्रकरण में दोषी सिर्फ ठेकेदार को ठहराया जा रहा है।
3.जिस जांच में अब जीपीएस तकनीक का हवाला दिया जा रहा है उस तकनीक का उपयोग पिछले वर्ष संबंधित के बिल भुगतान के पहले क्यों नहीं किया गया? 👉जबकि इस तकनीक पर आधारित नोटकेम के फोटोग्राफ्स निर्माण कार्यों की प्रगति तथा सम्पूर्ण होने की रिपोर्ट के साथ संलग्न किये जाने होते हैं। टूटी कलम
पढ़िये इस डबरी घोटाले के पीछे छुपे कुछ अनुत्तरित सवालों के जवाब ढूंढ़ती तथा मास्टरमाइंड तत्कालीन वनपरिक्षेत्र अधिकारी छोटेलाल डनसेना के अन्य काले कारनामों का कच्चा चिठ्ठा खोलते रहने की मुहिम जारी रहेगी.





