चुनाव नजदीक आते ही भाजपा कांग्रेस सरकार व सरकारी काम काजो का करने लगी विरोध ™️ आत्मानंद स्कूल का विरोध करने वालो के बच्चे पढ़ रहे है महंगे स्कूलों में ™️ क्या गरीबो के बच्चों को इंग्लिश स्कूल में पढ़ने का अधिकार नही है ™️
⭕️ टिल्लू शर्मा ✒️ टूटी कलम रायगढ़ हिंदी मॉध्यम, इंग्लिश मीडियम को लेकर स्कूल बचाओ संघर्ष मोर्चा ने जिला शिक्षाधिकारी आर पी आदित्य के कार्यालय में बाहर से तालाबंदी कर ताले की चाबी चक्रधरनगर थाना प्रभारी को सौप कर d e o के खिलाफ लिखित शिकायत भी दर्ज करवाई। थाना प्रभारी अभिनवकान्त की समझाई के बाद कार्यालय का ताला खोल दिया गया।
मोर्चा की इस हरकत के बाद जिला कलेक्टर भीम सिंह ने बेहद नाराजगी जतलाते हुए। मोर्चा के लोगो पर शासकीय कार्य मे बाधा उत्पन्न करने की एफआईआर दर्ज करवाने की बात कही है।
मिली जानकारी के अनुसार मामला तब तूल पकड़ लिया। जब नटवर स्कूल में बच्चों को छटवीं क्लास से 9वीं क्लास तक मे हिंदी मॉध्यम वालो का एडमिशन देने से इंकार कर दिया था। यहां यह बतलाना उचित है कि सरकार का उद्देश्य गरीब बच्चों को “आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल” के द्वारा अंग्रेजी शिक्षा दिलाना है। जिसे निजी स्कूलों वाले पचा नही पा रहे है। टूटी कलम
सूत्रों से मिली जाजकारी के अनुसार शासकीय आत्मानंद स्कूल के खुल जाने से निजी स्कूलों के व्यवसाय पर काफी प्रभाव पड़ेगा। जिस वजह से निजी स्कूल संचालकों के द्वारा स्कूल बचाओ मोर्चा को अंदुरिनि सहयोग किया जा रहा है। बतलाया जा रहा है कि जो लोग विरोध कर रहे है उनके बच्चे महंगे स्कूलों में पढ़ रहे है। पहले स्कूल के नामकरण को लेकर प्रदर्शन किया गया था। जिसका सुखद पटाक्षेप कलेक्टर के द्वारा करवा दिया गया था। अब नये मामले को लेकर राजनीति शुरू कर दी गई है। अब इस तरह के प्रदर्शन विधानसभा चुनावों के होते तक चलते रहेंगे। टूटी कलम
मेडिकल कॉलेज के नाम रखे जाने के समय क्यो जुबान बंद थी…… जिस समय रायगढ़ में बनने वाले मेडिकल कॉलेज का नाम सेठ लखीराम मेडिकल कॉलेज रखा गया तब धरना, प्रदर्शन,विरोध करने वाले कहां गए थे। उस समय प्रदेश में भाजपा की सरकार थी एवं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री स्वर्गीय लख्खीराम जी के पुत्र अमर अग्रवाल थे । इसलिए मेडिकल कॉलेज का नाम सेठ लखीराम मेडिकल कॉलेज रख दिया गया जबकि स्वर्गीय लखीराम जी के द्वारा रायगढ़ जिले में कोई भी ऐसा काम नहीं किया है कि जिसके लिए इतने बड़े उपक्रम का नाम उनके नाम पर रख दिया गया। जिला चिकित्सालय की ओपीडी पर्ची से सेठ किरोड़ीमल जी का नाम विलोपित कर लखीराम मेडिकल कॉलेज लिखा जाने लगा था । तब सब लोग कहां थे उस समय सब क्यों मौन हो गए थे । सेठ किरोड़ीमल जी के रहमो करम पर जीवित रहने वाले धर्मादा ट्रस्ट वाले भी अपनी जुबान खामोश रख लिए थे। टूटी कलम
सतनामी समाज को झुनझुना थमा दिया गया…. सतनामी समाज के द्वारा गुरु घासीदास के नाम पर मेडिकल कॉलेज किए जाने की मांग उठाई गई थी। तब सरकार ने चाल चलते हुए मेडिकल कॉलेज के अंदर के एक विभाग का नाम गुरु घासीदास के नाम पर कर दिया गया किंतु मुख्य बिल्डिंग का नाम सेठ लखीराम स्मृति मेडिकल कॉलेज ही रहने दिया। सतनामी समाज के द्वारा यह मान लिया गया था कि मेडिकल कॉलेज का नाम गुरु घासीदास के नाम पर नामांतरण हो गया है। जिस वजह से समाज के द्वारा पूरे शहर में आतिशबाजी कर मिठाइयां भी बाटी गई थी लेकिन जब असलियत सामने आई तो वे भी न जाने क्यों मौन साध लिए। टूटी कलम





