🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़……. रायगढ़ शहर की रिहायशी कालोनियों के सूने मकानों के अतिरिक्त शहर के अन्य हिस्सों में भी दिनोंदिन चोरी की वारदात बढ़ जाने से पुलिस की पेशानी पर बल पड़ गए थे। कबीर चौक उड़ीसा रोड स्थित पार्क सिटी कॉलोनी में हुई लाखों रुपए नगद एवं सोने चांदी के आभूषण चोरी की वजह से पुलिस की नींदे उड़ गई थी ,क्योंकि उक्त कॉलोनी के जिस मकान में चोरों ने चोरी को अंजाम दिया था वह मकान कांग्रेश के कद्दावर नेता एवं प्रतिष्ठित पानी व्यवसाई का था। जिस वजह से पुलिस पर काफी दबाव बना हुआ था। इस मामले को लेकर पुलिस फूंक फूंक कर कदम रख रही थी एवं अपने चहेते मीडिया के खबरीलालो को भी कुछ भी बताने से परहेज कर रही थी। शुरुआत में पुलिस ने जानबूझकर अपनी विवेचना की दिशा गलत बताई गई थी। ताकि विशेष चहेते मीडिया वाले शांत रह सके। पुलिस के द्वारा शुरू में इस तरह की प्रतिक्रिया दी गई कि मानो चोर अगले ही दिन उनकी गिरफ्त में आ जाएंगे। पुलिस बतला रही थी की चार संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है एवं कॉलोनी में लगे सीसीटीवी फुटेज में दो संदिग्ध लोग भी दिखाई पड़े हैं जिनकी पतासाजी की जा रही है। जिसके बाद मीडिया वाले खामोश बैठ गए एवं पुलिस ने अपनी विवेचना गोपनीय रूप से तेज कर दी थी। जिसका सकारात्मक परिणाम अंततः आ ही गया।
रायगढ़ पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा में उक्त चोरियों के पर्दाफाश करने का चैलेंज स्वीकार कर अपने सहयोगी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले एवं नगर पुलिस अधीक्षक दीपक मिश्रा को विशेष गुरु मंत्र देते हुए पुलिस के तेजतर्रार माने जाने वाले निरीक्षक भूपदेवपुर थाना प्रभारी अमित कुमार शुक्ला, जूट मिल चौकी प्रभारी हर्षवर्धन सिंह बैंस एवं सरिया थाने के उपनिरीक्षक कमल पटेल को उक्त चोरियों के पर्दाफाश करने की जिम्मेवारी सौंपी गई थी। जिसके बाद हर्षवर्धन सिंह बैंस एवं कमल पटेल की टीम सक्रिय होकर गोपनीय रूप से विवेचना में लग गई थी। पुलिस की टीमों ने शहर एवं आसपास के लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू किया। लगभग 150 – 200 सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाने के पश्चात उम्मीद की हल्की सी एक किरण दिखलाई दी । सीसीटीवी फुटेज में अनजान चेहरे देखे गए जिनकी तस्दीक पुलिस द्वारा करवाने पर सभी ने उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया। जिसके बाद पुलिस का शक पुख्ता हो गया की नगर में हो रही चोरियों के पीछे बाहरी गैंग का हाथ है। इस लक्ष्य को लेकर पुलिस की साइबर टीम को भी सक्रिय कर दिया गया। जो लगातार कृष्णाविहार,मालीडीपा केलोबिहार ,पार्क सिटी के मोबाइल टावरो से यह पता लगाने में जुटी गई थी की उक्त मोबाइल टावर क्षेत्रों में कौन-कौन से मोबाइल फोन का उपयोग चोरियोकी दिनांक को किया गया है। इसी बीच रायगढ़ साइबर सेल को एक लिंक प्राप्त हुआ जिसके आधार पर पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने पुलिस की दो टीमो को भारत- बांग्लादेश की पश्चिम बंगाल की सीमा पर बसे अंतिम गांव रवाना किया। वहां जाकर निरीक्षक हर्षवर्धन सिंह एवं उप निरीक्षक कमल पटेल की अगुवाई में भेजी गई पुलिस टीम ने लगभग 1 सप्ताह अपना डेरा डालकर जांच पड़ताल शुरू कर दी। काफी मशक्कत करने के बाद पुलिस की टीमों को सूत्र हाथ लगा कि गांव के ही कई लोग अन्य राज्यों में जाकर चोरी कर नगद रकम,सोने ,चांदी के जेवरात आदि लाकर उन्हें किसी महिला के हाथ से बाजार में खफा देते हैं एवं आपस में रकम का बंटवारा कर जमीन,जायदाद, मकान भी खरीदते हैं। इन दिनों चोरों के सरगना का तीन तल्ला भव्य मकान बन रहा है। उपरोक्त जानकारी बटोरने के पश्चात रायगढ़ से गई पुलिस टीम ने एक महिला सहित तीन आरोपियों को पकड़ कर रायगढ़ लाया गया । जिसके पश्चात उन्होंने रायगढ़ में हुई चोरियों में अपना हाथ होना स्वीकार किया एवं उन्होंने बताया कि चोरियों में साथ देने वाले चार अन्य लोग भी है जो फरार हैं । पुलिस के द्वारा फरार आरोपियों की पतासाजी की जा रही हैं। जिन्हें भी शीघ्र ही पकड़कर लाया जाएगा। चोरों से लगभग 7,50,000 नगद रकम ,सोने के जेवरात एवं लगभग 1 किलो चांदी बरामद की गई है। शेष माल मशरूका की जब्ती भी करने के प्रयास किए जा सकते हैं.
बांग्लादेश की सीमा से पकड़ाए चोरों को लेकर नगर में तरह-तरह की चर्चा होने लगी है ।लोगों का यह मानना है कि शहर एवं आसपास में बांग्लादेशी घुसपैठिए लोकल जान पहचान के आधार पर अपना ठिकाना आसानी से बना लेते हैं। इस कारण पुलिस को बांग्लादेशियों की पहचान के लिए अपने खबरी तंत्र सक्रिय करने होंगे एवं बांग्लादेशियों को पनाह देने वालों को भी चिन्हांकित कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। ऐसा अंदेशा है कि बांग्लादेशी पहले बिहार जाकर अपनी घुसपैठ बनाने की कोशिश करते हैं एवं बिहारी बोली सीखने के पश्चात वे कोलकाता आ जाते हैं एवं इसके बाद वे देश के विभिन्न राज्यों में फैल जाते हैं। जिसके परिणाम आने वाले दिनों में काफी घातक साबित होंगे।

