🎯 टिल्लू शर्मा संपादक 🖋️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़…… देश में सन 2013-14 के समय भाजपा के द्वारा नारा प्रचारित किया गया था। हर हर मोदी घर घर मोदी यह नारा जनता के दिलों दिमाग में इस कदर बैठ गया की चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था। तब से अब तक भाजपा केंद्र में राज कर रही है। आम जनता बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी,अराजकता,हिंसा आदि की वजह से इतनी त्रस्त हो चुकी है कि अब जनता परिवर्तन करने के मूड में है परंतु दुर्भाग्य यह है कि विपक्ष मे इतना कोई दमदार चेहरा नहीं है कि जिसके नाम पर कांग्रेश वोट शकेल सके। कांग्रेस पार्टी को मां सोनिया गांधी, बेटा राहुल गांधी, बेटी प्रियंका वाड्रा,ने यह प्रकार से हाईजैक कार अपने घर की पार्टी बनाकर रख दिया है। पार्टी अध्यक्ष की जब भी बात आती है तो अदला बदली मतलब की या तो सोनिया गांधी या राहुल गांधी ही कांग्रेस के अध्यक्ष बनते हैं।। गांधी परिवार से जब तक कांग्रेस को मुक्त नहीं किया जाएगा तब तक शायद सत्ता परिवर्तन होना असंभव। कांग्रेस पार्टी ने पुराने अनुभवी कांग्रेसियों को दरकिनार कर रखा है सुनाई में यहां तक आता है कि जब भी कोई कांग्रेसका कद्दावर नेता सोनिया गांधी या राहुल गांधी से मिलना चाहता है तो उसको समय ही नहीं दिया जाता और जब समय दे भी दिया जाता है तो सोनिया गांधी बीमारी की वजह से नहीं मिल पाती और राहुल गांधी अपने डॉगी को घुमाते फिराते, बिस्किट खिलाते, टहलते रहते हैं परंतु अतिथि नेताओं से बात करना भी मुनासिब नहीं समझते हैं। यह सब देखते हुए दिग्गज कांग्रेसी नेताओं का कांग्रेश से मोहभंग होने लगा है।
इस बार सन 2022 में केंद्र में बैठी भाजपा सरकार ने एक नया नारा दिया है “घर-घर तिरंगा” यह नारा शीघ्र ही जनता के दिलों दिमाग में इस कदर बैठ चुका है कि तिरंगा झंडा अपने घरों प्रतिष्ठानों में, लगाने के लिए बाजारों में,भाजपा कार्यालय में,कांग्रेस कार्यालय में, सरकारी दफ्तरों में चक्कर काटते देखे गए। जनता तिरंगा झंडा लगाने के लिए उतावले से दिखे । एक कारण यह भी है कि सरकार के द्वारा प्लास्टिक से बने झंडे की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिस वजह से सुई का दान कर अपनी पीठ थपथपाने वाली अनेक समाजसेवी संस्थाएं इस बार प्लास्टिक के झंडे बांटने से वंचित दिखी। हर-हर तिरंगा घर-घर तिरंगा जबकि तिरंगा कांग्रेस पार्टी की पहचान माना जाता है। इस तरह से भाजपा ने घर-घर तिरंगा पहुंचाकर कांग्रेस पार्टी के अस्तित्व को बढ़ावा दिया गया है।
अगर कांग्रेस पार्टी के बुद्धिजीवियो के द्वारा अपने दिमाग का इस्तेमाल किया जाए तो इस दफे होने वाले चुनाव में घर-घर तिरंगा के नारे का उपयोग कर मतदाताओं को रिझाया जा सकता है। देश के अधिकांश मतदाताओं को या भी नहीं मालूम होगा कि तिरंगे झंडे के बीच में अशोक चक्र बना होता है. वही दूसरी ओर कांग्रेश पार्टी के तिरंगे झंडे में पंजा चुनाव चिन्ह बना होता है. एक तरह से हिंदुस्तान के मतदाताओं को थोड़ी सी ही बुद्धि का इस्तेमाल कर रिझाया एवं बरगलाया जा सकता है। हमारे देश की जनता बहुत सीधी और बोली किस्म की है। ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस के द्वारा यदि इस तरह का प्रयोग किया जाए तो शायद सफल हो सकता है।
इस बार के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को ज्यादा मेहनत इसलिए नहीं करनी पड़ेगी क्योंकि भाजपा घर-घर तिरंगा के नाम पर प्रचार प्रसार कर चुकी है। यदि कांग्रेश तृणमूल कांग्रेस से गठबंधन का बंगाल की शेरनी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री के रूप में पेश कर चुनाव लड़े तो हो सकता है की इस बार केंद्र में कांग्रेस की सरकार बन सकती है।



