🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़ कल सिटी कोतवाली पुलिस ने शहर के शहीद चौक स्थित लोटस ब्यूटी पार्लर पर रेड डालते हुए कार्रवाई की गई। जहां से पुलिस के द्वारा 3 युवतियों एवं 3 युवको को संदेह के आधार पर थाना लाया गया। जहां पर पुलिस ने 109 ( संदिग्ध अवस्था में मिलने की कार्रवाई की गई।) जिसके बाद वेब पोर्टलो एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में देह व्यवसाय (सैक्स रैकेट)का हल्ला इस कदर मचाया गया. मानो की पुलिस के द्वारा बहुत बड़े सैक्स रैकेट का पर्दाफाश करते हुए पीटा एक्ट की कार्रवाई की हो। कुछ अति उत्साहित तथाकथित पत्रकारों ने बकायदा थाने के अंदर घुसकर युवतियों की फोटो खींच कर सोशल मीडिया पर बेपर्दा लगाई गई ।जो कि माननीय सुप्रीम कोर्ट, महिला आयोग के आदेशों की खुलकर अवहेलना है। बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, नोएडा आदि किसी भी जगहों पर जब भी दे व्यवसाय में लिप्त महिला एवं लड़कियों को पकड़ा जाता है तो उनकी फोटो भी बेपर्दा नहीं छापी जाती है. इस गंभीर मामले पर जिला पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा को कार्रवाई करना चाहिए। जिन युवक-युवतियों को थाना लाकर लॉकअप में बैठाया गया था बकायदा उनकी फोटोग्राफी की गई। यदि पुलिस के मना करने के बावजूद थाने में घुसकर फोटो खींची गई तो फोटो खींचने वालों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। चाहे वह पुलिस का कितने भी खास एवं मुखबीर के नाम पर जाने पहचाने जाने वाले चेहरे ही क्यों ना हो। यह कप्तान के द्वारा संज्ञान लेने का विषय है। लॉकअप में बैठी युवतियां फोटो में कॉपी पीने का लुफ्त उठाते हुए निश्चिंतता से दिखलाई पड़ रही है। फोटो में दिखलाई पड़ने वाली महिलाओं ने यह ठान लिया है कि उनके द्वारा कुछ पत्रकारों पर महिला आयोग की तरफ से एवं न्यायालय की तरफ से नोटिस भेजा जाएगा। टूटी कलम ने बहुत पहले ही इस विषय पर लिखा था कि बगैर अपराधी सिद्ध हुए किसी भी आरोपी का फोटो डालना मुसीबत का कारण बन सकता है । पुलिस वाले तो अपनी कार्रवाई कर, प्रेस वार्ता कर स्थानांतरण होकर चले जाएंगे और कमजोर विवेचना के कारण आरोपी अपराधी सिद्ध ना हो सका तो बरी होने के पश्चात उसके द्वारा फोटो सहित समाचार लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई या संगीन वारदात को अंजाम दिया जा सकता है। जिसका कारण पुलिस के अतिरिक्त अन्य कोई नहीं माना जाएगा।
ज्ञात रहे कि उक्त पार्लर में पूर्व में भी दो तीन बार बार कार्रवाई की जा चुकी है परंतु पुलिस की ढिलाई की वजह से उक्त पार्लर हमेशा से संदिग्ध रहता है। पिछली बार भी एक शासकीय कर्मचारी को मौके से पकड़ा गया था ।परंतु उस पर भी पुलिस ने नरमाई दिख लाते हुए मामले को खात्मा कर दिया गया। होना तो यह चाहिए था कि पूर्व कलेक्टर भीम सिंह के द्वारा उक्त कर्मचारी को सस्पेंड किया जाना चाहिए था। पुलिस के द्वारा यह सफाई दे दी जाती है की मौके पर महिला एवं पुरुष आपत्तिजनक अवस्था में नहीं पाए गए । इसलिए कार्रवाई का रुख मोड़ दिया जाता है। अब यहां पर यक्ष प्रश्न खड़ा होता है कि आखिर किस अवस्था में महिला पुरुष पाए जाने के बाद पुलिस के द्वारा पीटा एक्ट की कार्रवाई की जाती है। पुलिस की रेड के पश्चात जब भी पुलिस के द्वारा बंद कमरे को खटखटाया जाता है तो कमरे के भीतर उपस्थित महिला एवं पुरुष बैठे बातें करते पाए जाते हैं क्योंकि अपनी वास्तविक अवस्था में आने के लिए किसी को भी क्षण मात्र लगता है।






