टूटी कलम रायगढ़ जिले का ही नहीं अपितु पूरे छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित न्यूज वेब पोर्टल है. जिसके समाचारों का इंतजार प्रत्येक बुद्धिजीवी पाठक करते है. पत्रकारिता करना हमारा शौक है,जुनून है, दिनचर्या है, पागलपन है,कमजोरी है, लगन है, धुन है, ना कि पेट भरने का साधन है और ना ही धमकी चमकी देकर,वसूली,उगाही करने का लाइसेंस मिला हुआ है और ना ही किसी की चरण वंदना करना हमारा कर्तव्य है, संपादक टिल्लू शर्मा को निडर, निष्पक्ष, निर्भीक,बेबाक,बेखौफ दमदार,कलमकार, व्यंग्यकार, लेखक, विश्लेषक, कवि, कलम के मास्टरमाइंड, के रूप में पहचाना जाता है.जिनको परशुराम पुत्र, रावण भक्त, माता सरस्वती उपासक,चाणक्य,कबीर से प्रेरित कहलाना पसंद है.जलो मत बराबरी करो, जहां से लोगों की सोच खत्म होती है हमारी सोच वहां से शुरू होती है विज्ञापन का सहयोग भी लिया जाएगा, और मामला गंभीर होने पर समाचार भी लिखा जाएगा. शेर के पांव में कांटा चुभ जाने से कुत्ते जंगल पर राज नहीं करते सत्यमेव जयते, सत्य परेशान हो सकता है मगर पराजित नहीं हमारा अगला लक्ष्य टूटी कलम (डिजिटल) होगा। शेर अपने बल पर जंगल का राजा होता है क्योंकि जंगल में चुनाव नहीं होते
🔱टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम 🎤 न्यूज रायगढ़ 🌍 छत्तीसगढ़ 🏹 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील का असर अब राज्यों में भी देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बड़ा निर्णय लेते हुए मंत्री पद के साथ मिलने वाली वीआईपी सुविधाओं और प्रोटोकॉल का उपयोग सीमित कर दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि सामान्य परिस्थितियों में वे न तो पायलट गाड़ी का उपयोग करेंगे और न ही फॉलो वाहन लेंगे। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “आर्थिक आत्मरक्षा” और संसाधनों की बचत की अपील से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही सरकारी प्रोटोकॉल और सुरक्षा वाहनों का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी संसाधनों का संयमित उपयोग समय की मांग है और इससे प्रशासनिक व्यवस्था में भी सरलता और पारदर्शिता बढ़ेगी। उनके इस फैसले को प्रशासनिक हलकों में एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। इस निर्णय के बाद राज्य के अन्य मंत्रियों, निगम-मंडलों के अध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों पर भी इसी तरह की पहल अपनाने का दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सरकार की ओर से वीआईपी प्रोटोकॉल के उपयोग को लेकर नए दिशा-निर्देश भी जारी हो सकते हैं। ओ.पी. चौधरी का यह कदम राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है और इसे सरकारी खर्चों में कटौती तथा सादगीपूर्ण शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।