🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़….. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रायगढ़ विधानसभा के ग्रामों पुसौर एवं महापल्ली में भेंटवार्ता का कार्यक्रम आयोजित किया गया था. जिसको लेकर आशंका थी कि आम जनता को इस कार्यक्रम से कोई सरोकार नहीं रहेगा और ठीक वैसा ही हुआ जैसा सोचा गया था. लोईग में आयोजित भेंट वार्ता कार्यक्रम के दौरान लगाए गए पंडाल में भीड़ ना जुटने की वजह से स्कूली बच्चों को लाकर बैठा दिया गया था. पिछले कई दिनों से बारिश रुक जाने की वजह से पुसौर एवं लोईग में लगे भेंट मुलाकात कार्यक्रम के पंडाल में उपस्थित लोग उमस, गर्मी प्यास से व्याकुल होते देखे गए। पुसौर में भीड़ न जुटने का दूसरा कारण सरिया एवं बरमकेला को सारंगढ़ – बिलाईगढ़ जिले में विलय करने से नाराज ग्रामीणों ने भेंट मुलाकात कार्यक्रम से दूरी बनाकर रखी गई.
रोड शो को फ्लॉप ही समझा जाएगा…. ग्राम मुहिम से वापसी के पश्चात भूपेश बघेल का रायगढ़ में हेमू कालानी चौक से चक्रधर नगर चौक तक का महज 15 मिनट का पैदल रोड शो का आयोजन किया गया था. ज्ञात रहे कि इस रोड में लोगों के आवास नहीं होने की वजह से यह रोड आबादीहीन मानी जाती है . पीडब्ल्यूडी कार्यालय से लेकर चक्रधर नगर चौक तक एक भी घर नहीं है और ना ही दुकाने हैं. जो थोड़ी बहुत रौनक कमला नेहरू पार्क के अगल, बगल,सामने खोमचे,व्यंजनों की रेहडी लगाने वालो की वजह से है रहती है। आज वह भी उनको हटा देने की वजह से नहीं रही। मुख्यमंत्री के काफिले का इंतजार करते-करते बटोर कर लाए गए लोग धीरे-धीरे करके खिसक लिए। रोड शो के दौरान अन्य जिलों से बुलाये गये पुलिस बल,निगम के सारे कर्मचारी, समय के साथ पलटी मारु कांग्रेसी कहलाने वाले कार्यकर्ता, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के काफिले के साथ सुबह से चल रहे अधिकारी, नेता, पुलिस बल ही रोड शो के जनसमूह रहे। कुछ समाजसेवी संगठनों के द्वारा बघेल का लड्डू से सेब से तौल कर स्वागत किया गया। इस तरह का कार्यक्रम भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के आगमन पर भी इन संगठनों के द्वारा किया जाता रहा है। रायगढ़ शहर की कच्ची खोली एवं पक्की खोली जोकि सिंधी समाज के लोगों की कालोनिया कहलाती है. रोड शो के अंतर्गत ही आती है और सिंधी समाज के लोगों को कट्टर भाजपाई समझा जाता है. इनके वार्डों में पिछले कई दशक से कमल खिलता आ रहा है. पंकज कंकरवाल एवं कौशलेश मिश्रा इन क्षेत्रों से पार्षद चुने जाते आ रहे हैं. यदि मुख्यमंत्री के काफिले के साथ चल रहे अधिकारियों नेताओं निगम के कर्मचारियों पुलिस बल को अलग कर दिया जाए तो आम जनता एवं जनसमूह नदारद दिखा।