🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़… छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भेंट – वार्ता कार्यक्रम एवं रोड शो में शामिल होने की सूचना पाकर भाजपा कार्यकर्ताओं ,भाजयुमो ने उनका सांकेतिक विरोध किया गया. भाजपा एवं भाजपाइयों के द्वारा सप्ताह भर पहले से रायगढ़ जिले में इस तरह का माहौल बनाकर अफवाह फैला दी गई कि मानो वे भूपेश बघेल के आगमन पर हर गांव ,हर सड़क, हर मोहल्ले ,हर चौक – चौराहों पर काले झंडे थामे, काले कपड़े पहनकर,काले गुब्बारे हाथों में लेकर, माथे एवम हाथों में काली पट्टी बांधकर जंगी विरोध के रूप में इतिहास रचने के मूड में हो। मगर खोदा पहाड़ निकली चुहिया जैसा माहौल दिखलाई दिया। भाजपाइयों एवं भाजयुमो ने पुलिस को पूर्व में ही विरोध करने का ज्ञापन सौंप दिया था और किन किन जगहों पर कितने समय उनके द्वारा काले झंडे दिखलाए जाएंगे यह भी बतला दिया गया था। जिस वजह से पुलिस के अधिकारी एवं कर्मचारी उन स्थानों पर पहले से ही डट चुके थे। तय सीमा के समय भाजपा एवं भाजयुमो के कार्यकर्ता पहुंच कर पुलिस के सामने समर्पण कर दिए।
भाजपा एवं भाजयुमो के कार्यकर्ता के द्वारा स्थानीय पुलिस को पान मसाला खिलाए जाने , हंसी ठिठोली करने की स्पष्ट खबर है एवं उनके द्वारा पुलिस वालों से हाथ मिलाना एवं गलबहियां करते देखकर कोई भी नहीं कह सकता कि ये आंदोलनकारी एक ही नारा लगाते हैं की भूपेश बघेल डरता है और पुलिस को आगे करता है जबकि पुलिस से प्रगाढ़ता किसकी है यह किसी से नहीं छिपी हुई है। पूर्व में पुलिस के द्वारा जिला भाजपा अध्यक्ष को छेड़छाड़ के मामले में हाई कोर्ट से जमानत करवाने के लिए पूरा समय दिया गया था। जिस वजह से वे उनके खिलाफ 354 का मामला दर्द होने के बावजूद पूरे शहर में इत्मीनान से घूमते देखे जाते रहे ।
विरोध करने का तरीका इनसे सीखा जाना चाहिए ….किसी समय हलधर किसान छाप जनता पार्टी के खेमराज अग्रवाल के द्वारा अविभाजित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वर्गीय कुंवर अर्जुन सिंह को पद पर रहने के बावजूद सारंगढ़ चौक पर इकलौते होने के बाद भी काला झंडा दिखाया गया था। जिस सड़क से मुख्यमंत्री का काफिला गुजरना था । उस सड़क पर खेमराज अग्रवाल काला झंडा लिए चुपचाप छिपकर बैठे थे एवं जैसे ही पायलटिंग वाहन आगे निकले । उसी समय खेमराज अग्रवाल काला झंडा हाथों में थामे बीच सड़क पर मुख्यमंत्री के वाहन के सामने आ गए। जिसके बाद सभी गाड़ियों से उतरे कमांडो ने खेमराज को गिरफ्तार कर लिया था। जिसके बाद कमांडो एवं पुलिस ने खेमराज के साथ जो बर्ताव किया था वह केवल वे ही बतला सकते हैं। इस साहसिक विरोध की चर्चा पूरे मध्यप्रदेश में जमकर हुई थी एवं खेमराज अग्रवाल पूरे प्रदेश में हीरो बन गए थे। उस समय की घटना का चश्मदीद मैं स्वयं भी हूं । उस समय मेरी आयु बहुत ही कम थी। विरोध करने का तरीका एवं काला झंडा दिखलाने का तरीका खेमराज अग्रवाल के द्वारा दिखलाए गए काले झंडे से सीखा जा सकता है।


