🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दूसरे चरण में रायगढ़ विधानसभा के ग्राम पुसौर एवं लोइंग पहुंचे थे जिसके बाद अगले दिन स्थानीय सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता का आयोजन रखा गया था…. जिसमें मीडिया से जुड़े प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक वीडियो वेब पोर्टल आदि के शताधिक संपादक, जिला ब्यूरो चीफ, नगर ब्यूरो चीफ, कैमरामैन, माइक मैन,मशीन मैन, कंप्यूटर ऑपरेटर, प्रूफ्र रीडर उपस्थित थे। इनके अतिरिक्त प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेसी कार्यकर्ता, शासकीय अधिकारी,कर्मचारी,पुलिस बल, व्यवसाई उद्योगों के प्रतिनिधि भी पंडाल में मौजूद थे। मीडिया वालों के अतिरिक्त पंडाल के भीतर किसी अन्य को प्रवेश दिया जाना सर्वथा अनुचित है क्योंकि मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल के अनुसार उन्होंने सभी को से मिलने का अलग-अलग समय दिया गया था। पत्रकार किसी अन्य की वार्ता में, भेंट – मुलाकात में शामिल नहीं हुए थे तो अन्य लोगों को इसमें शामिल नहीं होने देना चाहिए था। भविष्य में पत्रकारिता का परिचय पत्र दिखाने पर ही अंदर प्रवेश दिया जाना चाहिए एवं अन्य लोगों का पूर्णतया निषेध कर देना चाहिए।
जब हंसी से अपने आप को रोक न सका पूरा सदन एवं स्वयं मुख्यमंत्री….. प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्रकारों से प्रश्न पूछने के लिए आमंत्रित किया तो किसी एक पत्रकार के द्वारा ना जाने कैसा प्रश्न पूछा गया था. जिसे ना तो सदन में बैठे अन्य लोग समझ सके एवं ना ही मुख्यमंत्री स्वयं भी समझ सके । उन्होंने कहा कि आपका प्रश्न आखिर है क्या इसे स्पष्ट करें. जिसके बाद मुख्यमंत्री के साथ मंचासीन लोग ,उपस्थित पत्रकारों आदि का समूह मुस्कुराते हुए अपनी खींसे निपोरे बिना नहीं रह सके।
पत्रकारों ने माइक छोड़ना नहीं चाहा…. प्रेस वार्ता से पहले पत्रकारों में इस बात पर सहमति बन गई थी कि किसी भी पत्रकार के द्वारा मुख्यमंत्री से एक प्रश्न पूछा जाएगा । जिसका उत्तर खत्म होने के बाद पश्चात दूसरे पत्रकार को प्रश्न करने का मौका दिया जाएगा। मगर हाथों में माइक आते ही पत्रकारों ने अपनी बात स्वयं के द्वारा झूठलाते हुए मुख्यमंत्री से लगातार 2- 3 प्रश्न कर डालें जिस वजह से प्रश्न करने के उत्सुक अन्य पत्रकारों को मौका नहीं मिल पाया और प्रेस वार्ता का समय समाप्त हो गया। उपस्थित लोगों की यह प्रतिक्रिया रही कि प्रश्न पूछने वाले पत्रकार अपने आप को मुख्यमंत्री की आंखों में बस जाने के लिए किसी हीरोपंती करते दिखे। जिससे भविष्य में कहीं भी मुख्यमंत्री के द्वारा उनको पहचान लिया जाए। एकमात्र यही मानसिकता रही होगी. प्रश्नकाल के दौरान मीडिया वालों ने इतने आसान से प्रश्न पूछे जिनका उत्तर प्रतिदिन दैनिक अखबारों में पढ़ा जा सकता है. इस वजह से मुख्यमंत्री को प्रश्न का उत्तर देने में तनिक भी परेशानी नहीं हुई .वे बड़ी सरलता से एवं विस्तृत रूप आसान से उत्तर देते चले गए. क्रमशः





