🎯 टिल्लू शर्मा 🖋️ टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़ रायगढ़ शहर के मलिन बस्तियों के निवासियों के बीच मंजू दीक्षित को एक मसीहा के रूप में जाना पहचाना जाता है। मंजूल दीक्षित इन बस्तियों के रहवासियों के सुख ,दुख ,थाना कोर्ट, कचहरी, बीमारी, अस्पताल आदि सभी जगह कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आते हैं एवं उनकी तन मन धन से पूरा पूरा सहयोग करते हैं। मंजूल दीक्षित को भाजपा के कद्दावर नेता के रूप में जाना जाता है। जो भाजपा संगठन में कई पदों पर रह चुके हैं एवं भाजपा की टिकट से पार्षद का चुनाव भी लड़ चुके हैं। शहर के पिछड़े कहे जाने वाला वार्डों में मंजूल दीक्षित की युवाओं के बीच अच्छी खासी पकड़ है। शहर के जितने दादा ,भैया, रंगबाज लोग हैं। सब मंजूल दीक्षित को बाप जी कहकर संबोधित करते हैं एवं उनके चरण स्पर्श करते हैं। शहर के बापूनगर रामभाठा, संजय मैदान, जोगीडीपा, इंदिरा नगर, कायाघाट, जेल पारा, सारथी पारा, आदि क्षेत्रों में मंजू दीक्षित लोगों के जन्म, मरण छठी, विवाह, दशकर्म, तेहरवीं आदि सभी कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। मंजूल दीक्षित को लोग इतना आदर, सम्मान क्यों देते हैं ? यह अपने आप में एक खोज का विषय है। जबकि वे ना तो विधायक है, ना विधायक के प्रतिनिधि हैं, ना नगर निगम के सभापति हैं. इसके बावजूद शहर में उनकी पहचान बहुत बड़ा मायने रखती है.
मंजूल दीक्षित के द्वारा अनंत चतुर्दशी के दिन अपने जन्मदिन पर हजारों लोगों को आमंत्रित कर दोपहर से देर रात 2:00 बजे तक स्वल्पाहार भोजन करवाया जाना जन चर्चा का विषय बना हुआ है। जन्मदिन के अवसर पर मंजुल दीक्षित के द्वारा जमकर शक्ति प्रदर्शन करना इस बात का एहसास करवा रहा है की आगामी होने वाले विधानसभा चुनाव में इनके द्वारा भाजपा से विधायक की टिकट की मांग की जा सकती है। इस शक्ति प्रदर्शन के बाद विधायक टिकट के लाइन में लगे दावेदारों की हालात खस्ता हो चुकी है। लक्ष्मीपुर चौक के सामुदायिक भवन में शहर के कोने कोने से युवा वर्ग पूरे जोशो खरोश के साथ जत्थो के रूप में पहुंचे एवं जन्मदिन की पार्टी में शामिल हुए। शामिल होने वालों में युवतियां एवं महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लोग आते रहे जाते रहे मंजूल दीक्षित को बधाइयां, शुभकामनाएं देते रहे, खाते रहे, और खुशियां मनाते रहे। इतनी भीड़ – भाड़ एवं दादा – भैया लोगों के जमावड़ा होने पर भी किसी भी किस्म की विवाद की स्थिति निर्मित नहीं हो पाई जो कि मंजुल दीक्षित के दब दबे का परिचय है। मंजू दीक्षित के जन्मदिन पर आम से लेकर आज तक के वर्ग के लोग भी पहुंचे थे। जिनमें राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारी, शासकीय कर्मचारी एवं अधिकारी भी शामिल रहे। मंजुल दीक्षित अपने रॉबिन हुड वाले अंदाज में सब से मिलते रहे एवं सबका अभिवादन स्वीकारते रहे।
शहर के सभी प्रमुख चौक चौराहों पर मंजूल दीक्षित के जन्मदिन के होल्डिंग्स एवं फ्लेक्स वाले बोर्ड उनके समर्थकों ने अपने अपने खर्चे पर लगवाए थे। लक्ष्मीपुर चौक एवं सामुदायिक भवन मंजूल दीक्षित के कटआउट एवं आकर्षक झालरों से सजाया गया था। जिसके लिए भी युवाओं ने स्वयं मेहनत की थी ना कि मजदूरों का सहारा लिया गया था।
पिछले कुछ वर्षों से लोगो के गरीबों के मसीहा, रॉबिनहुड, बाप जी कहलाने वाले मंजूल दीक्षित विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उतावले हैं। उनके द्वारा पिछले चुनाव में खरसिया विधानसभा से चुनाव लड़ने की सरगर्म चर्चा थी । मंजूल दीक्षित,उमेश पटेल के विरोध में खड़े होकर चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार थे। यहां से अच्छे-अच्छे भाजपा के रणबांकुरे शिकस्त खा चुके हैं। स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल, स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव, लक्ष्मी पटेल,गिरधर गुप्ता, ओपी चौधरी ने यहां से किस्मत आजमाई थी परंतु ये सफल नहीं हो सके थे। यह सब जानते, बुझते भी मंजूल दीक्षित ने यहीं से चुनाव लड़ने का मन बना लिया था किंतु अपरिहार्य कारणों से वे चुनाव ना लड़ सके। राजनीति एक खुला मैदान क्षेत्र है। जहां से कोई भी कभी भी अपनी किस्मत आजमाने के लिए कोशिश कर सकता है। यदि मंजुल दीक्षित चुनाव लड़ते हैं तो वह हारे या जीते इससे लोगों को कोई सरोकार नहीं रहेगा परंतु चुनाव बहुत ही दिलचस्प एवं रोचक हो जाएगा। ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि जो नजारा स्वर्गीय अर्जुन सिंह एवं स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के चुनाव के दौरान देखने को मिला था । वही नजारा कुछ हद तक मंजुल दीक्षित के चुनाव रण में उतर जाने पर देखा जा सकता है। बरहाल यदि भाजपा मंजूर दीक्षित को टिकट दे देती है तो।





