🎤 टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम रायगढ़ छत्तीसगढ़ अंग्रेजी माध्यम की प्राइवेट स्कूलों के खर्चे वाहन करना मध्यम परिवार के हद से बाहर हो चुका है। जरूरी समस्या से निदान के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा कम फीस पर गुणवत्ता पूर्वक पढ़ाई के लिए प्रदेश के सभी जिलों में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की नींव रखी गई थी। शुरुआती समय में विपक्ष के द्वारा काफी हो हल्ला मचाया गया था और स्कूल खोलने का धरना प्रदर्शन आंदोलन तक किया गया था। धीरे-धीरे करके जब अच्छी क्वालिटी के फर्नीचर ,सुयोग्य शिक्षक शिक्षिका, लेबोरेटरी, प्रयोगशाला, खेल मैदान युक्त आत्मानंद स्कूलो के भवन बनकर तैयार हो गए तो जो लोग स्कूल का विरोध करते थे वे अपने बच्चों को इस स्कूल में भर्ती करने के लिए आगे आए और अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर किसी भी तरह से इस स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए बेसब्र रहे।
प्राइवेट स्कूल संचालकों को रास नहीं आया सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूल मोटी एडमिशन फीस के अतिरिक्त काफी, पुस्तक ड्रेस, जूता, टाई, मोजा, बेल्ट, ट्रांसपोर्टिंग, सभी में प्राइवेट स्कूलों का कमीशन बंधा रहता है। एनुअल फंक्शन, त्योहार, 15 अगस्त, 26 जनवरी, कभी टीचर्स डे, कभी ये डे, कभी वो डे, गेम्स के नाम पर प्रत्येक बच्चों से रुपया मंगाया जाता है भले ही बच्चो ने कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति,सहभागिता न निभाई हो। स्कूल संचालकों के मनमाने रवैए से त्रस्त होकर कर्जा बाड़ी कर स्कूलों का पहले मुंह बंद किया जाता रहा है। स्वामी आत्मानंद स्कूल खुलने के बाद प्राइवेट स्कूलों में अध्ययन करने वाले बच्चों की संख्या में कमी देखी गई है तो वही स्वामी आत्मानंद स्कूल में किसी भी क्लास की कोई भी सीट खाली नहीं रहती है। इसलिए इस सरकारी स्कूल का विरोध शनै शनै खत्म हो गया क्योंकि विपक्ष के पास स्कूल के नाम का कोई मुद्दा नहीं रह गया।
