जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन की मेहनत पर फिर सकता है पानी रायगढ़ विगत 45 दिनों से कोरोना महामारी को लेकर जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने जो सक्रियता दिखाई थी वह काबिले तारीफ है। साम-दाम-दंड-भेद की नीति से परिपूर्ण प्रशासन ने लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग मास्क लगाना, बेवजह घूमने पर पाबंदी लगाकर अपने तरीके से समझाइश देकर रायगढ़ जिले को ग्रीन जोन में रख पाने की मेहनत अब लगता है कि सार्थक सिद्ध नहीं हो सकती होगी, क्योंकि सरकार ने शराब दुकानें खुलवा कर राज्य के लिए शायद बहुत बड़ी गलती कर दी। जिससे जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन का मनोबल भी धराशाई हो गया । शराब दुकानों में लगती लाइने उमड़ते लोगो की भीड़ से एवं बाहर से आने वाले मजदूरों श्रमिकों के कारण इस जिले में कभी भी कोरोनावायरस की दस्तक हो जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। जिस तरह से सरकार ने अघोषित कर्फ्यू में सुबह 7:00 से शाम 4:00 तक दुकानें खुलने की अनुमति प्रदान की है एवं डीजीपी अवस्थी ने जिस तरह से पुलिस प्रशासन के पर कतरे हैं उसको देख कर तो लगता है कि अब पुलिस भी पूरी ढिलाई करने के मूड में आ चुकी है । पुलिस द्वारा शहर में सारी सड़कों से लगाए गए बैरिकेड एवं अवरुद्ध किए गए मार्ग पूर्णतया खोल दिए गए हैं साथ ही यातायात पुलिस द्वारा जुर्माने, चालान,लाक लगाने के नियम को भी किनारे रख दिया है। एक दुपहिया वाहन में 3,4 सवारी बैठे चाहे एक चार चकिया में 8,10 बिगड़ैल नवाब रात को पीक कर हुड़दंग करे तब भी पुलिस को उस तरफ से निगाह फेर लेनी है। जिस तरह से डीजीपी डीएम अवस्थी ने पुलिस प्रशासन को बंधन में बांध कर रख दिया है। यह बंधन आने वाले दिनों में बहुत बड़ी मुसीबत का कारण बन सकता है । पिछले 45 दिनों में पुलिस ने 24 घंटे ड्यूटी निभा कर अपना फर्ज तो अदा किया एवं कोरोना संक्रमण से रायगढ़ जिले को सुरक्षित रखा। यह पुलिस कप्तान संतोष कुमार सिंह की दूरदर्शिता,कड़ी मेहनत, कौशल का परिणाम है कि जिले में अपराधी प्रकरणों में गिरावट आ चुकी थी एवं पुलिस कप्तान के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा नगर पुलिस अधीक्षक अविनाश ठाकुर सभी थाना क्षेत्रों के प्रभारी आरक्षकों, पुलिस बल, महिला पुलिस, नगर सैनिक,जिला कमांडेंट, रक्षित निरीक्षक अमरजीत खूंटे की टीमों ने अपना कार्य बखूबी से निभाया सभी थाना क्षेत्रों के प्रभारियों एवं स्टाफ द्वारा दनादन अवैध शराब की जब्ती कर अवैध शराब का कारोबार करने वालों के मंसूबों पर पानी फेर दिया गया साथ ही लॉक डाउन के समय बिगड़ैल नवाबजादे रईसजाड़ो के द्वारा सजाई जा रही जुए की महफिलो पर ताबड़तोड़ कार्रवाई कर सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाया गया। पुलिस द्वारा फर्जी पत्रकारों को पकड़ा गया । प्रतिबंधित पान मसालों एवं गुटको के अवैध कार्यो पर ताबड़तोड़ कार्यवाही कर पान मसाला, बीड़ी, सिगरेट,तंबाकू आदि के सेवन करने वालों के हसीन ख्वाब तोड़ डाले गए। कितना अच्छा लगता था मनुष्य सुबह 5:00 बजे उठकर अपने काम पर लग जाता और 10:00 बजे तक अपने अति आवश्यक काम निपटा कर घर वापस आ जाता था। इससे यह अंदाजा आसानी से लग रहा है कि जो मनुष्य रोजाना 14 -15 घंटे कोल्हू के बैल की तरह कार्य कर जितना कमाता है उतना वह केवल 5 घंटे कार्य कर कमा सकता है । इसके अतिरिक्त सुबह जल्दी उठना रात में जल्दी सो जाना परिवार वालों के साथ घुलमिल कर रहना,घर पर ही तरह-तरह के खेल खेलना,बीवी बच्चों से प्रेम करना, बूढ़े माता-पिता की सेवा करना, यह सब एक आदर्शवादी जीवन शैली वालों की पहचान है ।45 दिनों के लाकडाउन में यह बात भी सामने आई कि लोग बिना होटलिंग के, बगैर फास्ट फूड के, बगैर शराब के,बगैर ऑनलाइन खरीदी के, बगैर सिनेमा के, बगैर मॉल के,बगैर पार्लर के, भी आसानी से जिंदा रह सकता है। 45 दिनों में लोगों की लगभग सभी गंदी आदतें छूट गई थी डॉक्टरों एवं दवा दुकानों में लगने वाली लंबी-लंबी लाइने छोटी होकर रह गई थी। शहर की आबोहवा पूर्ण रूप से स्वच्छ एवं निर्मल हो चली थी लोगों में अपनत्व की भावना जागृत हो गई थी।
अब मगर एक अंजाना सा डर जनमानस के मन में समा गया है कि लॉक डाउन के बेअसर होते ही जिस तरह से लोग बाजारों एवं सड़कों पर दिख रहे हैं उससे लगता है कि वह दिन दूर नहीं है की कोरोना का आक्रमण हमारे शहर में भी हो जाए।
जिसका मुख्य कारण पुलिस प्रशासन के पर कतर देना एवं उनको बंधन में बांध कर रख देना के अतिरिक्त अन्य कोई कारण नहीं हो सकता है। जनता सिर्फ पुलिसिया भाषा ही समझती है। जिसे बैनर, पोस्टर, लाउडस्पीकर, के माध्यम से समझाना मतलब भैंस के आगे बीन बजाना हो सकता है।
टिल्लू शर्मा
सम्पादक टूटी कलम







