✌️टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम रायगढ़ …. पूरे प्रदेश में रायगढ़ शहर का केवड़ा बाड़ी बस स्टैंड ही एक ऐसा बस स्टैंड होगा. जहां रात भर पुलिस की नरमाई एवं सेटिंग की वजह से लोगों का जमावड़ा लगा रहता है. रायगढ़ शहर के तमाम बिगड़ैल नवाबजादे,गुंडे मवाली, बदमाश, टपोरी,जुआरी,सटोरी,चोर उचक्के,इस बस स्टैंड में रात 11बजे के बाद कभी भी देखे जा सकते है. पेट्रोलिग के नाम का दिखावा करती मुफ्त का डीजल फूंकती वाहन केवल ड्राइवर एवम एकमात्र पुलिस कर्मी के साथ कोने में खड़ी होकर मूक दर्शक बने वाहन में ही बैठे रहने में है अपनी भलाई समझते है.किसी को कुछ न कहने,पूछने का साहस करने वाले पुलिस कर्मी अपनी ड्यूटी पूरी शिद्दत के साथ करना बतलाकर अधिकारियों की नजरो में अपने अंक बढ़ाने के लिए चापलूसी करने में लगे रहते है.अधिकारियों को इतनी भी फुर्सत नही रहती कि वे कभी कभार शहर की स्थिति का औसत निरीक्षण करने निकल सके.
केवड़ा बाड़ी बस स्टैंड के अतिरिक्त शहर के सभी चौक, चौराहों, रेलवे स्टेशन,चक्रधर नगर थाना क्षेत्र,जूटमिल थाना क्षेत्र में बड़ी आसानी से शराब के लिए चखने,डिस्पोजल,पानी,पान,पाउच,बीड़ी, सिगरेट,मूंगफली,मुर्रा,मिक्सचर,आदि की दुकानें एवम ठेले देर रात तक खुले देखे जा सकते है.जिन्हे पुलिस के नाम का तनिक भी डर भय नहीं होता है क्योंकि पुलिस वाले भी इनके मुफ्त के ग्राहक जो ठहरे होते है.
बाहर से आने जाने वालों पर पुलिस की कोई पकड़ नहीं रहती है.. रायगढ़ शहर में यदि कोई रात भर भी घूमता रहे तो पेट्रोलिंग करती पुलिस पार्टी उससे कोई भी सवाल जवाब नहीं करती है. जिस वजह से प्रांत से आए हुए लोग आसानी से रेकी कर अपने मंसूबों में कामयाब होकर निकल जाया करते हैं. लोग छोटे-मोटे अपराधों की शिकायत पुलिस में करना उचित नहीं समझते हैं. जिस वजह से रायगढ़ पुलिस अपनी पीठ खुद ही थपथपाती है. अवैध व्यवसाय करने वालों से पुलिस की नजदीकियां,गलबहियां किसी से नहीं छिपी है.
जिलेभर में मीडिया के नाम पर पुलिस की चाटुकारिता करने वाले लोग इतने अधिक हो गए हैं कि पुलिस भी निश्चिंत हो चुकी है कि उनकी पोल खोलने वाला कोई नहीं है. पुलिस विभाग से जारी प्रेस विज्ञप्तियों को कुछ तथा कथित पत्रकार कहलाने को अपनी शान समझने वाले लोग सुपर फास्ट गीतांजलि एक्सप्रेस से भी तेज गति से कॉपी पेस्ट कर वायरल करते हैं. मानो उन्हें पुलिस विभाग से महावारी वेतन मिलता है और यदि उनसे पहले कोई पुलिस का समाचार वायरल कर देगा तो उनके पौवा पेटी को खतरा उत्पन्न हो जाएगा. कुछ पत्रकारो को निगरानी शुदा बदमाशो की तरह से प्रतिदिन सुबह,दोपहर,शाम रात पुलिस थानों में हाजरी बजाते देखे जा सकते है। जबकि हकीकत में ये लोग अपराधियों की पुलिस से मध्यस्थता करवाने, कमीशन खाने वाले एवम पुलिस के खबरीलाल होते है.

