🔥टिल्लू शर्मा ✒️ टूटी कलम रायगढ़ ✌️ आर एन आई दिल्ली से रजिस्टर्ड कलमकार.. पूर्व पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह,अभिषेक मीणा के कार्यकाल के समय में तेजतर्रार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा, नगर पुलिस अधीक्षक अविनाश ठाकुर,थानेदार विवेक पाटले,अमित शुक्ला,एस एन सिंह,युवराज तिवारी,कृष्णकांत सिंह,मनीष चंद्र नागर,आदि की पदस्थापना के समय भले ही उन पर सेटिंग के आरोप प्रत्यारोप लगते रहे परंतु इन लोगो के द्वारा रोजाना अवैध कार्यों पर कारवाई की जाती रहने की वजह से एक दहशत कायम रहती थी. इन लोगो का कहना था लेंगे भी और कारवाई भी करेंगे. कोरोना काल का समय याद करने पर इन सभी के चेहरे सामने आ जाते है। इसी तरह से किरोड़ीमल नगर डकैती हत्या के समय इन लोगो की जांबाजी किसी से नहीं छिपी है.
रायगढ़ जिला अवैध कार्यों एवम कमाई के लिए पूरे छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश के अतिरिक्त पूरे देश में जाना पहचाना जाता है. बड़े-बड़े औद्योगिक घराने रायगढ़ जिले में आकर बहुत ही आसानी से अपनी कमाई का जरिया ढूंढ लिया करते हैं. इसी तरह जब कोई अधिकारी या कर्मचारी अन्य स्थान से तबादला होकर रायगढ़ आते है तो वे यहां होने वाली कमाई से इतने लाल हो जाते है की रिटायरमेंट के बाद अपना आशियाना यहीं बना लिया करते है.सब से ज्यादा मलाई पुलिस विभाग के कर्मचारी खाते हैं क्योंकि यहां पर हर कदम पर पैसे का जुगाड़ रहता है. रायगढ़ जिले के अनेक थानों में दशकों से कर्मचारी डटे हुए हैं. यदा कदा ट्रांसफर हो जाने पर ऊपर जाकर रकम खर्च करके पुनः अपना ट्रांसफर रायगढ़ जिले में ही करवा लिया करते हैं. पुलिस अधीक्षक के द्वारा जारी किए जाने वाले स्थानांतरण आदेश का भी कोई फर्क नहीं पड़ता. जैसे तैसे करके पुलिस अधीक्षक के आदेश को भी रद्द करवा दिया जाता है या फिर मान मनौव्वल कर अपने पसंदीदा थाने में ही ड्यूटीरत रह जाते है. रायगढ़ जिले में पदस्थ छोटे से छोटे आरक्षक महंगी दुपहिया वाहन की सवारी करते है एवम लग्जरी चार पहिया वाहन इनोवा, स्कार्पियो, बोलेरो, स्विफ्ट डिजायर,आर्टिगा आदि खरीदकर किराए पर चलाते है या फिर पुलिस विभाग में ही माहवारी किराए पर लगाकर स्वयं सवारी करते है.जिनकी टूट फुट,डीजल,मोबिल,ड्राइवर सभी का भार विभाग वहन करता है, और तनख्वाह के साथ साथ वाहन का किराया लेकर लाख रुपए की शुद्ध कमाई करते है. ऊपर से होने वाली आमदनी, महावारी नजराना अलग से फिक्स हुआ करते हैं.इनके बच्चे भी नामी गिरामी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करते है। जहां मध्यम वर्गीय परिवार शिक्षा दिलाने की सोच भी नह सकता.





