🎤टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम रायगढ़ … छत्तीसगढ़ प्रदेश में पिछले 15 साल राज कर चुकी भाजपा 5 साल सत्ता से बाहर रही और अब जब सत्ता मिली तो पूरा भाजपा संगठन असमंजस की स्थिति में आ गया था कि प्रदेश का मुख्यमंत्री किसको बनाया जाना चाहिए. जब प्रदेश संगठन में कोई सोच काम नहीं आई तब उक्त विषय से केंद्रीय संगठन को अवगत कराया गया और उचित मशविरा मांगी गई. तब केंद्रीय गृह मंत्री ने अपने द्वारा विष्णु देव साय को किया गया आश्वासन याद आया और उन्होंने विष्णु देव साय को मुख्यमंत्री पद के लिए नामित कर दिया. जिस पर सभी विधायकों ने अपनी सहमति जतला दी और विष्णु देव साय की ताजपोशी हो गई. विष्णु देव साय के साथ दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का भी कारण यह है कि भाजपा किसी भी जाति को नाराज नहीं करना चाहती है क्योंकि आगामी तीन माह के बाद लोकसभा चुनाव होने हैं. इसलिए ब्राह्मण खेमे से विजय शर्मा और ओबीसी खेमे से अरुण साव की उपमुख्यमंत्री के रूप में ताजपोशी की गई. मुख्यमंत्री को शपथ दिलाने की खातिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायपुर आए थे किंतु,मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री के अतिरिक्त अन्य कैबिनेट मंत्रियों को शपथ नहीं दिलवाई गई क्योंकि भाजपा संगठन मंत्रियों के नाम पर सहमति नहीं बना सकी थी. दुनिया के सारे मीडिया चैनल छत्तीसगढ़ में पुणे भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री बनना बता रहे थे और पाशा उल्टा पड़ गया. 3 दिसंबर को चुनावी नतीजे आ जाने के बाद भाजपा के द्वारा मुख्यमंत्री चेहरा तलाश में एक सप्ताह लगा दिया गया और कैबिनेट मंत्री चुनने के लिए 15 दिन लग गए.
आनन फानन में की गई कैबिनेट की बैठक, लिए गए अकल्पनीय पूरा न हो पाने वाले निर्णय.... मुख्यमंत्री बनने के बाद विष्णु देव साय को न जाने कैसी हड़बड़ी रही कि बगैर कैबिनेट मंत्रियों के शपथ लिए कैबिनेट की बैठक कर डाली. जिसमें दो उप मुख्यमंत्री और विभागों के सचिव उपस्थित रहे. बैठक में मुख्यमंत्री के द्वारा प्रदेश के अंदर 18 लाख प्रधानमंत्री आवास बनाने एवं 2 साल के धान का बोनस देने का निर्णय लिया गया. यह दोनों निर्णय अव्यवहारिक और जल्दबाजी में लिए गए हैं. सामने लोकसभा चुनाव है इसलिए जनता जनार्दन को दिग्भ्रमित करने का प्रयास हो सकता है. सर्वप्रथम तो 18 लाख मकान बनाने सहज नहीं है. यदि एक मकान के बनाने में कम से कम 3 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे तो 18 लाख मकान बनाने में कितने रुपए खर्च होंगे इसको बतलाने में कैलकुलेटर भी फेल का गया है. 18 लाख लाख आवास बनाने के लिए जगह भी चाहिए इसलिए जगह की कीमत भी जोड़ी जानी चाहिए. इसी तरह धान का बोनस 2 साल का एक साथ दिए जाने का फैसला लिया गया है परंतु धान मंडियों में अब तक धान की खरीदी शुरू नहीं हो सकी है. धान की खरीदी का समर्थन मूल्य कितना दिया जाएगा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है.
आनन फानन में की गई कैबिनेट की बैठक मुख्यमंत्री के द्वारा बुलाई गई कैबिनेट की बैठक आश्चर्य एवं सोचनीय विषय है क्योंकि प्रदेश सरकार के द्वारा अभी तक मंत्रिमंडल का गठन नहीं किया जा सका है और मंत्रियों के नाम दिल्ली भाजपा हाई कमान से तय होने के बाद बतलाए जाएंगे. प्रदेश के राज्यपाल तक दिल्ली प्रवास पर है. जिनके आने के बाद ही मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकेगी. जबकि 16 तारीख से खरमास लग रहा है और हिंदुओ में ऐसी मान्यता है कि खरमास में कोई भी अच्छे कार्य नहीं किए जाते हैं. भाजपा स्वयं को हिंदूवादी पार्टी और सनातनधर्मी पार्टी कहती है. इसलिए भाजपा के द्वारा खरमास को मान्यता देनी चाहिए. अभी तक विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर और नेता प्रतिपक्ष का भी नाम सामने नहीं आया है. इनके बावजूद कैबिनेट की बैठा के आयोजित कर देना अपने आप में एक प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है. यह केवल छत्तीसगढ़ राज्य का हाल है ऐसा नहीं है राजस्थान एवं मध्य प्रदेश में भी कुछ इसी तरह के हालात हैं.
खरमास में शुरू होगा विधानसभा का पहला शीतकालीन सत्र.. राजनीति गलियारों से खबर आ रही है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा का पहला शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर से प्रारंभ होने जा रहा है. उम्मीद यह लगाई जा रही है कि विपक्ष कांग्रेस के द्वारा सत्र के दौरान काफी हो हल्ला मचाया जाएगा. 2 दिन पहले बने कैबिनेट मंत्री किस तरह के फैसले आरोप, प्रत्यारोप, प्रश्न उठाएंगे. इन सबके लिए पहले होमवर्क करना जरूरी होता है. ताकि प्रश्न काल के दौरान यक्ष प्रश्नों की झड़ी लगाई जा सके. विपक्ष में बैठने वाले कांग्रेसी विधायक पूरी तरह से कमर कस कर प्रश्न उठाने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो चुके हैं.






