रायगढ़ कोरोना वायरस महामारी के फल स्वरूप लगे लॉक डाउन के बीच बहुत बड़ी दुखद खबर आई की रायगढ़ से 13 किलोमीटर दूर ग्राम तेतला में लगभग 2 माह से बंद पड़ी पेपर फैक्ट्री जहां की काफी निर्माण का कार्य किया जाता है। उसकी टंकी की साफ सफाई में लगे तीन मजदूर जब टंकी के अंदर उतरे तो वे पानी एवं टंकी में पड़े किसी रसायन से बनकर निकलने वाली जहरीली गैस के संपर्क में आ गए और वे टंकी के अंदर ही बेहोश होकर गिर पड़े। जिनकी सहायता के लिए दो अन्य मजदूर भी टंकी में उतरे और वे भी बेहोश होकर गिर गए किसी तरह आसपास कार्य कर रहे अन्य मजदूरों ने आकार टंकी से उन्हें बाहर निकाला गया एवं इसकी सूचना उन्होंने गांव के सरपंच कापी फैक्ट्री के मालिक को दी गई सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि कॉपी उद्योग के द्वारा मजदूरों को हैंड ग्लोब मास्क आदि उपलब्ध क्यों नहीं करवाए गए। जबकि अभी देश के प्रत्येक नागरिक को मास्क लगाने के लिए सरकार भरपूर प्रयास कर प्रेरित कर रही है। ऐसे में मजदूरों से बिना हैंडग्लोब बिना मास्क लगाएं करवाया जाना वाला कार्य किसी भी रूप में वैध नहीं हो सकता। घटना का समय लगभग 3:30 बजे दोपहर बताया जा रहा है किंतु उक्त घटना की सूचना पुसौर की तहसीलदार माया अंचल को लगभग रात 9:00 बजे दी गई तो वे मौके पर पहुंच कर घटना की सूचना आला अधिकारियों को दे दी गई थी। तहसीलदार ने सरपंच एवं उद्योग के मालिक के साथ मिलकर प्रभावितों को इलाज के लिए संजीवनी नर्सिंग होम रायगढ़ भेजा गया बस यहीं से शुरू हो जाता है पूरा लीपापोती करने का खेल जिसमें सभी की अकर्मण्यता खुलकर सामने आई कि तहसीलदार, सरपंच, उद्योग के मालिक, संजीवनी नर्सिंग होम के प्रबंधन ने इसकी सूचना जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन को देना उचित नहीं समझा जिसमें किसी बहुत बड़े षड्यंत्र की बू आ रही है। वह तो संयोग है कि इस बात की सूचना प्रभावितों के अत्यंत गंभीर हो जाने पर पूरे शहर में बिजली की तरह से फैल गई आनन-फानन में जिला दंडाधिकारी यशवंत कुमार, जिला पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह, अनुविभागीय दंडाधिकारी उर्वशा, मुख्य जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी एसएन केसरी समेत जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी साँवड़िया परिसर स्थित संजीवनी नर्सिंग होम आ पहुंचे तब जाकर पूरा मामला सामने आया कि उद्योग प्रबंधन की गैर जिम्मेदारना कार्य के कारण तीन मजदूर मौत के मुहाने पर पहुंच चुके हैं। यदि समय रहते जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, स्वास्थ्य अमला नही पहुंचता तो हो सकता है कि इस मामले पर नर्सिंग होम प्रबंधन, उद्योग प्रबंधन, तहसीलदार, सरपंच के द्वारा लीपापोती कर दी जाती जब गैस पीड़ितों की सुधि लेने जब आला अधिकारी पहुंचे तो मामले की गंभीरता को भांपते हुए कलेक्टर यशवंत कुमार ने उद्योग प्रबंधन शक्ति पेपर मिल के मालिक को गैस पीड़ितों के उच्च इलाज हेतु रायपुर ले जाने के एक टुक में आदेश दिए तब जाकर कापी कारखाने के मालिक के कानों पर जूं रेंगी एवं उसने आनन-फानन में एंबुलेंस की व्यवस्था कर रायपुर ले जाने पर मजबूर होना पड़ गया। जिला कलेक्टर यशवंत कुमार के आदेशानुसार कॉपी उद्योग के मालिक को भी गैस पीड़ित मजदूरों के साथ रायपुर जाना पड़ा कुल मिलाकर देखा जाए तो इस मामले को लीपापोती कर मिटाने का भरपूर प्रयास किया गया। खरसिया विधानसभा क्षेत्र के गांव में हुए इतनी बड़ी घटना से क्षेत्रीय विधायक एवं उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल को भी अनजान रखा गया ऐसा जान पड़ता है क्योंकि अभी तक उमेश पटेल की तरफ से कोई भी बयान नहीं आया है।
टिल्लू शर्मा सम्पादक ✍️टूटी कलम✍️






