नंबर वन की तरफ तेजी से बढ़ रहा *टूटी कलम समाचार* पत्रकारिता करना हमारा शौक है, जुनून है, आदत है, दिनचर्या है, कमजोरी है,लगन है,धुन है, पागलपन है ,पत्रकारिता करना हमारे पेट भरने का साधन नहीं है, और ना ही ब्लैकमेलिंग, धमकी,चमकी,देकर, विज्ञापन के नाम पर उगाही,वसूली करने का लाइसेंस मिला हुआ है, संपादक टिल्लू शर्मा लेखक, विश्लेषक, कवि,व्यंगकार,स्तंभकार, विचारक, माता सरस्वती का उपासक,परशुराम का वंशज,रावण भक्त,कबीर से प्रभावित,कलम का मास्टरमाइंड, सही और कड़वी सच्चाई लिखने में माहिर, जहां से लोगों की सोचना बंद कर देते है हम वहां से सोचना शुरू करते है, टिल्लू शर्मा के ✍️समाचार ज्यों नाविक के तीर,🏹 देखन म छोटे लागे, घाव करे गंभीर, लोगों की पहली पसंद टूटी कलम समाचार बन चुका है, सरकार एवं जिला प्रशासन का व्यवस्थाओं समस्याओं पर ध्यान आकर्षण करवाना हमारा पहला कर्तव्य है
🔱टिल्लू शर्मा ✒️टूटी कलम न्यूज 🌍 रायगढ़ छत्तीसगढ़ 🏹 ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने और नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से अदाणी फाउंडेशन ने रायखेड़ा में 30 दिवसीय निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया। इस विशेष अभियान में कुल *3000 लोगों ने नेत्र जांच कराई, जिनमें 13 गांवों के ग्रामीण और *1000 स्कूली बच्चे* शामिल थे। जांच के बाद जरूरतमंदों को निःशुल्क दवाइयों एवं चश्मों का वितरण भी किया गया। इस शिविर में विजन स्प्रिंग टीम ने आधुनिक उपकरणों की मदद से जांच की और प्रत्येक व्यक्ति को सही निदान एवं परामर्श प्रदान किया। शिविर के माध्यम से फाउंडेशन का उद्देश्य ग्रामीण भारत में नेत्र स्वास्थ्य की समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच सुनिश्चित करना और जरूरतमंदों को दृष्टि सुधार के साधन उपलब्ध कराना था।
यह शिविर लगातार 30 दिनों तक चला, जिसकी शुरुआत ग्राम रायखेड़ा के स्कूल से हुई। वहीं उद्घाटन समारोह में स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और अदाणी फाउंडेशन के अधिकारी उपस्थित रहे। शिविर से रायखेड़ा समेत भाटापारा गैतरा, चिचोली, गौरखेड़ा, खम्हरिया, कोनारी, बरतोरी, छतौद, तुलसी, सोनतारा, मुरा, मोहरेंगा और समोदा सहित कुल 13 गांवों के ग्रामीणों को लाभ मिला। नेत्र जांच के बाद जिन लोगों को चश्मे की आवश्यकता थी, उन्हें निःशुल्क चश्मे उपलब्ध कराए गए। इस पहल से न केवल ग्रामीणों के जीवन में सुधार की उम्मीद है बल्कि बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की दिनचर्या भी आसान होगी।
शिविर में आए लाभार्थियों ने इस पहल की सराहना की। रायखेड़ा निवासी रामलाल साहू ने बताया, “मैं पिछले तीन साल से धुंधला देख रहा था। इस शिविर में जांच हुई और मुझे चश्मा मिला। अब मैं साफ देख पा रहा हूँ। अदाणी फाउंडेशन का धन्यवाद।” वहीं स्कूली छात्रा पूजा वर्मा ने कहा, “पढ़ाई में दिक्कत हो रही थी। जांच के बाद चश्मा मिला, अब किताबें आसानी से पढ़ पा रही हैं
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में अदाणी फाउंडेशन की यह पहल न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभ बना रही है, बल्कि लोगों में नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी फैला रही है। फाउंडेशन ने संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसे शिविरों की संख्या बढ़ाई जाएगी और ग्रामीण स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।






