🔱 टिल्लू शर्मा ✒️ टूटी कलम न्यूज़ 🎤 रायगढ़ 🌍 छत्तीसगढ़ 🏹..सन 2014 के बाद मीडिया का गिरता स्तर 2026 तक चरम पर आ गया है। नेताओं,कार्यकर्ताओं, उद्योगति,रसूखदारों, समाज सेवियों,अधिकारियों सभी लोग मीडिया को अपने पैर की जूती भी नहीं समझते है। जिसका कारण सोशल मीडिया,विज्ञप्तियों के सहारे बैशाखी लेकर चल रही मीडिया है। अंग्रेजों के शासनकाल में मीडिया इतनी नहीं डरी जितनी अब विकासशील भारत की मीडिया डर रही है। राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक समाचार चैनल वाले वही दिखायेंगे,वही बोलेंगे, जिसे केंद्र,राज्य सरकार से हरी झंडी मिलती है। यदि जनसुविधाओं,समस्याओं के विषय पर कोई मुंह खोल देता है तो उस पर अनेक तरह की कार्रवाई करवा कर परेशान कर समर्पण करवा दिया जाता है। मीडिया देश के बड़े उद्योग घरानों की पालतू बन कर रह गई है। इससे ज्यादा बुरी हालत में प्रिंट मीडिया चल रही है। जिसमें बाकायदा केंद्र सरकार,प्रदेश सरकार की विज्ञप्तियों को प्रकाशित कर जन जन तक केंद्र ,प्रदेश सरकारों की वाह वाही से लबरेज अखबार पंपलेट के रूप में बंटवाए जाते है।जिसकी एवज में अनेक अवसर पर भारी भरकम रकम देकर कलम खरीद ली गई है।
खींचो न कमानों को न तलवार निकालो
जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो..समय ने उक्त पंक्तियों के परिभाषा ही बदल कर रख दी,अब तो पैसा,इज्जत कमानी है तो चांदी के जूते से बिक जाओ,क्योंकि सच बोलने वालो के लिए कोई जगह नहीं बची है। जो चरण जितना चाटेगा,उसका उतना ही फायदा है।







