रायगढ़ – नगर निगम की बात ही कुछ निराली है। जब शहर लॉकडाउन से गुजर रहा था तब गरीबों की रोटी – रोजी पर बुलडोजर चला कर नेस्तनाबूद किया जाकर शहर के चहुंओर हो रहे अवैध पक्के अतिक्रमणों पर से नजरें फेरी जा रही थी। जबकि निगम कार्यालय बन्द होने पर अतिक्रमण हटाओ को तेजी दी जा सकती थी। खस्ताहाल सड़कों का ईलाज न सही मरहम पट्टी तो की जा सकती थी। अमृत मिशन के नाम पर मनमानी तरीके से खोदी जा रही सड़कों को व्यवस्थित तरीके से खुदाई एवं भराई पर सख्त रवैया तो अपनाया जा सकता था। गांधी प्रतिमा के इर्द गिर्द सड़कों पर मौसमी फल,फूल के लग रहे पसरो को गांधी गंज के भीतर या पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पास स्थाई रूप से व्यवस्थित किया जा सकता था। हंडी चौक पर दुर्गा पंडाल के लिऐ गिराए गए मुरूम के पहाड़ को हटवाया जा सकता था जो कि मार्ग संकरा करने के अतिरिक्त अवैध कार गैरेज बनकर रह गया है। ऐन निगम के मुहाने पर एक जानलेवा गढ्ढा हो गया है। जिसे आधा अधूरा पाटकर दुर्घटनाओं का जन्मदाता बनाकर छोड़ दिया गया है। शायद निगम की सीमेंट,गिट्टी,रेत कहीं और तो नही खपा दी गई। जूटमिल रोड पर होटल रिलेक्स के सामने डिवाइडर के दोनों तरफ की सड़क पर बड़े बड़े गढढे हो रखे है। जो कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है क्योंकि बाजू में ही गहरा नाला है। शुक्रवार को नो फ्युल डे मनाने एवं शनिवार को गरीबों की जीविका पर बुलडोजर वाले जरा सायकल से घूम घूम कर सड़कों की भी फिक्र करते। क्रमशः——लगातार ध्यानाकर्षण की मुहिम







