रायगढ़—– निष्पक्ष, निर्भीक,निडर पत्रकारिता दिनों दिन दम तोड़ रही है। कारण की जैसा देश वैसा भेष जिसकी सरकार रहे केवल उसी का गुणगान करना और अपना धँधा चमकाना ही पत्रकारिता रह गई है। कलमवीरो का स्थान व्यवसाईयों ने ले लिया है। सरकार,समाज,प्रशासन को आईना दिखलाना और सच्चाई सामने लाने वाले पत्रकार अब अंगुलियों पर गिनने लायक ही बचे रह गये है।
चापलूसी करने में महारथ हासिल करने वाले लोग वेब पोर्टल के माध्यम से पत्रकार बने फिर रहे है। प्रायः यह लोग वाईस टाइपिंग का सहारा लेकर समाचार बनाते है। जिसकी हर पंक्ति में गलतियों का समावेश होता है।अधिकारियों,नेताओ,उद्योगपतियो की गोद मे बैठने वाले लोग भला क्या पत्रकारिता कर सकते है।
पुलिस डी एस आर,निगम जनसम्पर्क विभाग,जिला जनसम्पर्क विभाग,उद्योगो के पी आर ओ विभाग आदि से मिले समाचारों को ही समाचार मान लेना क्या पत्रकारिता होती है। जमीनी स्तर पर की गई रिपोर्टिंग ही पत्रकारिता की पहचान होती है। नाकारात्मक समाचारों से सभी तंत्रो को काम करने की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास होता है जो कि सर्वहारा वर्ग के लिये फायदेमंद होता है। बाउजी,बाबूजी पर विलाप करने को जनमानस अच्छे से समझते है। महीना,सालाना नजराना तय कर गलत को भी सही बतलाना या फिर चुप्पी साध लेना ही पत्रकारिता रह गई है। हाई प्रोफाइल मामलों को उजागर न करना अपितु दबाने का प्रयास क्या पत्रकारिता की श्रेणी में आता है। पत्रकारिता समाज का दर्पण कहलाता है और दर्पण कभी छिपा नही सकता। अन्य लोगो के समाचारों को नमक मिर्च लगाकर परोसना सजातीय लोगो के कुकर्मो पर पर्दा डालने का प्रयास करना एवं हर छोटे छोटे हथकंडों का सहारा लेना क्या निष्पक्ष पत्रकारिता है। इन सब को देखकर आने वाली पीढ़ी के कलमवीर क्या सीख सकते है। अपने से कनिष्ठ पत्रकारो के समाचारों को कॉपी पेस्ट कर समाचार बनाना क्या स्वच्छ पत्रकारिता होती है। पत्रकारिता का गिरता स्तर देखकर कभी कभी लिखने से मन फट जाता है और लगता है भेड़ बकरियों की भीड़ में शामिल हो लिया जाये। जब तक जनसम्पर्क विभाग आर एन आई वालो को प्राथमिकता नही देगा तब तक नये नये पत्रकारो की फसल उगती रहेगी।






