🔴बगैर निर्माण किये 4 लाख रुपये की राशि गड़ाम🔴इंजीनियर एवं ठेकेदार ने शासन को लगाई चपत🔴ठेकेदार संजय अग्रवाल के द्वारा पूर्व में किये गए कार्यो को खंगालना हुआ आवश्यक🔴निगम में इंजीनियरो एवं भ्र्ष्टाचार का चोली दामन सा साथ है🔴केवल रिकवरी का नोटिस या फिर आर्थिक आपराधिक मामला दर्ज करवाया जायेगा🔴👇👇👇👇👇
नगरनिगम के एक ठेकेदार को 3 लाख 80 हजार रुपये का फर्जी बिलिंग कर लाभ पहुचाने के मामले में अब राजनीति गरमा गई है। एमआईसी सदस्य और पीडब्ल्यूडी प्रभारी विकास ठेठवार ने कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर फर्जी बिलिंग करने वाले ठेकेदार और इंजीनियर पर एफआइआर दर्ज करने की मांग की है। विकास ठेठवार ने अपने ज्ञापन में कहा कि वार्ड क्रमांक 41 में दो स्थानों पर पचरी निर्माण हेतु कार्य आदेश ठेकेदार संजय अग्रवाल को दिया गया था। उक्त स्थल पर निर्माण किए बगैर ही ठेकेदार संजय अग्रवाल को दो स्थानों के निर्माण हेतु लगभग तीन लाख 80 हजार का भुगतान कर दिया गया है। इस संबंध में पार्षद प्रतिनिधि ने शिकायत किया था कि उक्त स्थल पर पचरी निर्माण का कार्य हुआ ही नहीं है जिसके फलस्वरूप कमिश्नर ने जांच कमेटी द्वारा उक्त क्षेत्र में स्थल निरीक्षण और वार्ड वासियों के समक्ष पंचनामा में पाया कि उक्त कार्य पुराना है वहां किसी प्रकार का नया निर्माण हुआ ही नहीं है, जो कि गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ठेठवार ने पत्र में लिखा कि नगर निगम में कार्यपालन अभियंता अजीत तिग्गा के चहेते ठेकेदार संजय अग्रवाल द्वारा कई ऐसे कार्यों को मिलीभगत कर नियम व शर्तों के विरुद्ध कार्य कर निगम को क्षति पहुंचाने का कार्य अनवरत जारी है। ऐसे में ठेठवार ने उपरोक्त कार्य किए बगैर भुगतान करना शासन की राशि का दुरुपयोग करना बताया है। इस अनियमितता के विरुद्ध दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ ही ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने हेतु कलेक्टर से निर्देशित करने की मांग की है। ताकि भविष्य में इस प्रकार की अधिकारी और ठेकेदार सांठगांठ से इस तरह के कृत्य को अंजाम देने की हिमाकत न कर सके। यहां बता दें की ठेकेदार संजय अग्रवाल और निगम के ईई के विरुद्ध सीधे ठौर पर एफआईआर दर्ज करने की मांग से हड़कम्प मच गया है। हालांकि कमिश्नर ने कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ठेठवार ने कलेक्टर के अलावे नगरीय प्रशासन मंत्री, सचिव नगरीय प्रशासन, संचालक व आयुक्त को भी पत्र लिखकर ठेकेदार संजय अग्रवाल और ईई अजित तिग्गा की शिकायत की है। अब देखने वाली बात है कि निगम आयुक्त केवल रिकवरी तक ही कार्रवाई करते हैं या फिर मामले में एफआईआर दर्ज करवाते हैं।




