🔴महिला की ओव्हरी का गलत इलाज के लिये
डा.राजकृष्ण को चुकाने होगें 16 लाख रुपयें🔴
सुप्रीम कोर्ट ने राजप्रिय हास्पिटल के संचालक राजकृष्ण शर्मा
की अपील को किया खारिज भरना पड़ेगा हर्जाना🔴
शहर के राजप्रिय हास्पिटल राजप्रिय के संचालक डा. राजकृष्ण शर्मा को गलत इलाज करने के एवज में 16 लाख 32 हजार रुपये का हर्जाना देना होगा। इस संबध में चार साल पहले एक फैसला उपभोक्ता फोरम व्दारा दिया गया था। जिसकी अपील सुप्रीम कोर्ट में भी खारिज हो गयी। मामला रायगढ़ के नृसिंह मंदिर कोष्टापारा के चंद्रभूषण मिश्रा का हैं जिनकी पत्नी शुभलक्ष्मी मिश्रा का इलाज डा. राज कृष्ण शर्मा ने फरवरी 2011 में किया था। महिला को ओव्हरी में ट्यूमर की शिकायत थी। जिसमें एक ओव्हरी सहित ट्यूमर व फेलोपियन ट्यूब निकालने की बात कही गयी थी। डा. अजय शेष पैथोलाजिस्ट ( रैणुका पैथोलाजी लैब ) कोरबा ने उसकी बायोपसी जांच की और कैंसर के लक्ष्ण नहीं पाये जाने की रिपोर्ट दी थी । डा.राजकृष्ण शर्मा व्दारा किये गये आपरेशन के बाद महिला का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता चला गया। बाद में गर्भावस्था के दौरान महिला को ओव्हरियन कैंसर होने की जानकारी मिली तो इलाज के लिये एम्स हॉस्पिटल दिल्ली ले जाया गया। जहां महिला को नियमित क्रीमोथेरपी दी गयी और डाक्टरों ने आपरेशन कर महिला की दोनों ओव्हरी व फेलोपियन ट्यूब को निकाला गया। जबकि डा.राजकृष्ण शर्मा ने मेडिकल रिपोर्ट में एक ओव्हरी को निकाला जाना लिखा था। इस तरह राज्य उपभोक्ता आयोग ने डा.राजकृष्ण शर्मा व्दारा किये गये आपरेशन को पूर्णत: त्रुटीपुर्ण मानते हुये शिकायत को सही पाया था। और 9 प्रतिशत ब्याज के साथ 12 लाख रुपये हर्जाना अदा करने के आदेश दिये थे। जो अब तक मय ब्याज सहित 16 लाख 32 हजार रुपये के लगभग हो गये है। जिसके खिलाफ राजप्रिय हॉस्पिटल के संचालक राजकृष्ण शर्मा ने माननीय उच्चतम न्यायालय ने अपील दायर की थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी गलत ढंग से आपरेशन करना माना एवं हर्जाने की राशि यथावत रखते हुए डॉ राजकृष्ण शर्मा से हर्जाना देने का फैसला लिख कर दायर की गई अपील खारिज कर दी गई।







