कितनो की मांग का सिंदूर उजड़ा होगा,कितनो की चूड़ियां टूटी होगी,कितनो के सर से पिता का साया उठा होगा, कितनो के मां बाप का सहारा छीना होगा,कितनी बहनों की राँखिया का हक चला गया होगा। किसी का भाई,किसी का बेटा,किसी का पति चला गया। अब वक्त आ गया है खून का बदला खून से लेने का,देश को खंडित होने से बचाने का








